रायपुर, 26 अप्रैल। Rural Electrification : अबूझमाड़ के जंगलों और प्रभावित इलाकों में अब ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नारायणपुर जिले के ग्राम इरपानार में दशकों बाद पहली बार बिजली पहुंचने से पूरा गांव रोशनी से जगमगा उठा है। यह बदलाव न केवल अंधकार को दूर कर रहा है, बल्कि विकास की नई राह को भी दूर कर रहा है। इस उपलब्धि के पीछे नियाद नैला नर योजना की अहम भूमिका है, जिसके तहत पेड़ों के नीचे और समुद्र में गहराई तक खोदाई की जा रही है। बिजली आने से जीवन में सुरक्षा, सुविधा और संचार का संचार हुआ है।
दुर्गम निर्माण के बीच पूरा हुआ डेवलपर कार्य
इरपानार तक बिजली स्विचना आसान नहीं था। घने जंगलों, पहाड़ी जंगलों और कच्चे स्ट्रॉबेरी के बीच बिजली के खंभे और तार के खंभे के लिए डिवाइन टीम को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। कई स्थानों पर मानव श्रम और स्थानीय सहायता से सामग्री पहुंच के कार्य को पूरा किया गया।
56 लाख की लागत से विस्थापित विस्थापित की आयु
इस परियोजना पर लगभग 56.11 लाख रुपये की लागत आई, जिसके तहत गांव के हर परिवार को पहली बार विद्युत कनेक्शन मिला। यह प्रथम उस सोच का प्रतीक है जिसमें अंतिम लक्ष्य पर आधारित व्यक्ति से लेकर विकास तक का लक्ष्य रखा गया है।
बच्चों की पढ़ाई और जीवन में आते हैं बदलाव
बिजली आने से अब बच्चों को रात में पढ़ने के लिए ऑटोमोटिव लाइट मिलेगी। मोबाइल उपकरणों, पुर्तगाल और अन्य घरेलू सामानों से बचना आसान होगा। भविष्य में यहां डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और छोटे अनमोल के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
अन्तिम में खुशी और उत्साह का राक्षस
जब पहली बार गांव में बिजली जले, तो बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी के सामने खुशी के स्वर उभरे। वर्षों से अंधकारमय जीवन जी रहे लोगों के लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं था। शासन और प्रशासन के लिए इस बदलाव की घोषणा की गई।
पर्यटन में विकास का अध्याय नया
बस्तर के अन्य प्रभावित जिलों जैसे कि बीजापुर के चिल्कापल्ली और टेमिनार में भी हाल के समय में बिजली के झटके हैं। अब ईरपानगर और आसपास के इलाकों को सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं से जोड़ने का काम तेजी से किया जा रहा है, जो क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम है।

