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CG Farming : यूरिया की टेंशन खत्म…! नील-हरित शैवाल से बढ़ेगी पैदावार और घटेगी लागत

CG Farming: No More Urea Worries...! Blue-Green Algae to Boost Yields and Lower Costs.

CG Farming

रायपुर, 24 अप्रैल। CG Farming : धान की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए नील-हरित शैवाल (ब्लू-ग्रीन एल्गी/सायनोबैक्टीरिया) एक प्रभावी जैविक उर्वरक के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र, राजनांदगांव की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गुजन झा के अनुसार, नील-हरित शैवाल वातावरण से नाइट्रोजन को अवशोषित कर मिट्टी में स्थिर करता है, जिससे धान की फसल को प्राकृतिक पोषण मिलता है। इसके उपयोग से उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है, वहीं प्रति हेक्टेयर 25 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन की बचत भी होती है। इस जैविक उर्वरक के उपयोग से यूरिया और अन्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है, जिससे किसानों की लागत घटती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। यह मिट्टी को भुरभुरा बनाकर जड़ों के विकास में मदद करता है और लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘एनाबीना’ और ‘नॉस्टोक’ प्रजातियां धान के खेतों के लिए सबसे उपयोगी मानी जाती हैं। हालांकि, किसानों को सावधानी बरतते हुए केवल प्रमाणित और प्रयोगशाला में विकसित शैवाल का ही उपयोग करना चाहिए, क्योंकि प्राकृतिक स्रोतों में कुछ विषैले तत्व भी हो सकते हैं।

ऐसे करें उपयोग

घर पर ऐसे बनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल किसानों (Blue-Green Algae Farming) की आय बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा देगी।
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