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Sanjeevani 108 : लेमरू में स्वास्थ्य सेवाओं की नई शुरुआत… संजीवनी सेवा बनी जीवनदायिनी… संजीवनी सेवा से मिली त्वरित राहत

Sanjeevani 108: A New Beginning for Healthcare Services in Lemru... The Sanjeevani Service Proves to be a Lifesaver... Sanjeevani Service Delivers Immediate Relief.

Sanjeevani 108

रायपुर, 22 अप्रैल। Sanjeevani 108 : कोरबा ज़िला के दुर्गम वनांचल लेमरू क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जिला मुख्यालय से 80 से 90 किलोमीटर दूर स्थित इस क्षेत्र में लंबे समय तक चिकित्सा सुविधाओं की कमी रही, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कई घंटे लग जाते थे।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन में यहां संजीवनी 108 एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की गई है। अब एक कॉल पर एंबुलेंस गांवों तक पहुंचकर मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध करा रही है, जिससे ग्रामीणों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल रही है।

दूरस्थ गांवों को मिला सीधा लाभ

लेमरू क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लगभग 20 गांवों की 16 हजार से अधिक आबादी को इस सेवा का लाभ मिल रहा है। इनमें विशेष पिछड़ी जनजातियों के लोग भी शामिल हैं, जो पहले स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित थे। अब गढ़उपरोड़ा, देवपहरी, अरसेना, नकिया, रापा, बड़गांव, छातीबहार और अन्य गांव इस सेवा से जुड़े हैं।

चलती-फिरती जीवनरक्षक इकाई

यह एंबुलेंस केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि एक सुसज्जित चिकित्सा इकाई है। इसमें स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, ऑक्सीजन सिलिंडर, जांच उपकरण, दवाएं और गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी हर समय सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।

सैकड़ों मरीजों को मिला समय पर उपचार

पिछले एक वर्ष में लगभग 1200 मरीजों को इस सेवा के माध्यम से समय पर उपचार मिल चुका है। हृदयघात, सड़क दुर्घटना, सर्पदंश, प्रसव जटिलताओं और अन्य गंभीर बीमारियों में यह सेवा कई लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई है।

स्वास्थ्य व्यवस्था हुई और मजबूत

जिले में नई एंबुलेंस सेवाओं के जुड़ने से आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था और सुदृढ़ हुई है। लेमरू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहले ही गुणवत्ता मानकों के लिए प्रमाणित हो चुका है और अब इस सेवा के साथ यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर हो गई हैं।

ग्रामीणों में बढ़ा भरोसा

इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें निजी साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और समय पर निःशुल्क चिकित्सा सहायता मिल रही है। ग्रामीणों के लिए यह सेवा अब भरोसे का प्रतीक बन चुकी है और उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रही है।

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