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Economic Corridor : रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से बस्तर को मिलेगी नई रफ्तार… यात्रा समय में भारी कमी

Economic Corridor: Raipur-Visakhapatnam Corridor to Give New Momentum to Bastar... Massive Reduction in Travel Time

Economic Corridor

रायपुर, 20 अप्रैल। Economic Corridor : Bastar की प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए Raipur-Visakhapatnam Economic Corridor NH-130CD एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में उभर रहा है। भारतमाला परियोजना के तहत निर्मित हो रहा यह छह लेन मार्ग न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि बस्तर को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ने में सेतु का कार्य करेगा।

वर्तमान में Jagdalpur से Visakhapatnam तक की यात्रा कठिन घाटों से होकर गुजरती है, जिसमें सात से नौ घंटे का समय लगता है। नया मार्ग इस दूरी को घटाकर लगभग साढ़े तीन से चार घंटे कर देगा, जिससे परिवहन सुगम और किफायती होगा।

नबरंगपुर बनेगा महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु

यह कॉरिडोर Raipur, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से होकर गुजर रहा है। नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज बस्तर के लिए प्रवेश द्वार साबित होगा, जिससे क्षेत्र सीधे बंदरगाह और व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ सकेगा।

स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार

इस परियोजना से बस्तर के स्थानीय उत्पाद जैसे कॉफी, इमली, महुआ और ढोकरा शिल्प को बड़े बाजार तक पहुंचने में आसानी होगी। परिवहन लागत कम होने से किसानों और शिल्पकारों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

रोजगार और विकास के नए अवसर

बेहतर संपर्क व्यवस्था से शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगी। साथ ही कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सकेगा।

खनिज और औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा

बस्तर क्षेत्र खनिज संपदा से समृद्ध है। यह कॉरिडोर खनिजों को तेजी से बंदरगाह तक पहुंचाने में सहायक होगा, जिससे निर्यात और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। इसके आसपास नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की भी संभावनाएं बढ़ेंगी।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। बस्तर के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थल अधिक सुलभ होंगे, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

पर्यावरण के साथ संतुलित विकास

परियोजना के तहत सुरंगों और वन्यजीव अनुकूल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे। यह आधुनिक तकनीक और प्रकृति संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह परियोजना बस्तर सहित पूरे राज्य के लिए विकास का नया द्वार खोलेगी और क्षेत्र को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी इसे प्रदेश में कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को गति देने वाला कदम बताया।

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