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PM Van Dhan Yojana : वनधन योजना (PMVDY) से महिला सशक्तिकरण…जनजातीय महिलाओं के लिए आर्थिक बदलाव का माध्यम बनी वनधन योजना

PM Van Dhan Yojana: Women's Empowerment through the Van Dhan Yojana (PMVDY)—The Van Dhan Yojana has emerged as a catalyst for economic transformation for tribal women.

PM Van Dhan Yojana

रायपुर, 16 अप्रैल। PM Van Dhan Yojana : वनधन योजना ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम बनकर उभरी है। ट्राइफेड और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से यह योजना स्थानीय वन उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर उद्यमी बना रही है।

कांकेर में वनधन विकास केंद्र से बढ़ी आजीविका

जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित कांकेर के अंतर्गत इच्छापुर में संचालित हर्रा वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। मर्दापोटी क्लस्टर के 17 गांवों के 2137 परिवार इस योजना से जुड़े हैं, जिनमें से 1512 परिवार लघु वनोपज संग्रहण के माध्यम से आजीविका चला रहे हैं।

प्रसंस्करण केंद्र के जरिए आत्मनिर्भरता की राह

जिला प्रशासन द्वारा खनिज विकास निधि से मशीनें, पैकेजिंग सामग्री और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बाद केंद्र का संचालन शुरू हुआ। इंदिरा वन मितान स्व-सहायता समूह की महिलाएं यहां वनौषधियों का संग्रहण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग का कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है।

आयुर्वेदिक उत्पादों का उत्पादन और प्रशिक्षण

केंद्र में हर्रा, बहेड़ा, त्रिफला, अश्वगंधा, सफेद मूसली, नीम, सतावरी और आंवला चूर्ण सहित 8 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मानकों के अनुसार पैकेजिंग की जाती है और महिलाओं को विशेषज्ञों द्वारा नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है। आयुर्वेद विभाग और राज्य संघ का तकनीकी सहयोग भी लगातार मिल रहा है।

करोड़ों का उत्पादन और बढ़ती आय

पिछले चार वर्षों में इस केंद्र से 75 लाख 76 हजार 375 रुपये के वनौषधि उत्पाद तैयार कर कांकेर मार्ट को आपूर्ति की गई है। इससे प्रत्येक सदस्य को सालाना लगभग 35 से 40 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। पहले मजदूरी पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब आयुर्वेदिक उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बन गई हैं। वे न केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं। उनका बढ़ा हुआ आत्मविश्वास अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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