रायपुर, 15 अप्रैल। राज्य शासन की पुनर्वास नीति कोण्डागांव जिले के पुनर्वासित युवाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। कभी भय और हिंसा के माहौल में भटके युवा अब मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। शासन की पहल से उन्हें न केवल सुरक्षित वातावरण मिला है, बल्कि कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
पुनर्वास केन्द्र में मिल रहा कौशल प्रशिक्षण
ग्राम कुधुर के तुलसी राम, रजमन और गोबरू वर्तमान में कोण्डागांव जिले में संचालित पुनर्वास केन्द्र में रह रहे हैं। यहां वे लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण के तहत उन्हें वायरिंग कार्य की बारीकियां सिखाई जा रही हैं, ताकि वे आगे चलकर स्वरोजगार स्थापित कर सकें।
तुलसी राम ने सुनाई बदलाव की कहानी
तुलसी राम कश्यप ने बताया कि पहले क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल था, जिसके कारण वे संगठन से जुड़ गए थे। लेकिन राज्य शासन की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। वर्तमान में वे दो माह के वायरिंग प्रशिक्षण में शामिल हैं, जिसमें लगभग 15 दिन का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे अपने क्षेत्र में वायरिंग का कार्य शुरू कर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं।
रजमन और गोबरू भी बनेंगे स्वरोजगार का उदाहरण
रजमन और गोबरू ने भी पुनर्वास नीति के अंतर्गत समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। दोनों युवक इलेक्ट्रीशियन ट्रेड का प्रशिक्षण ले रहे हैं और उनका विश्वास है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे अपने गांव में स्वयं का रोजगार शुरू करेंगे। इससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ-साथ गांव के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मिल रहा नया अवसर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा संचालित पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस नीति का उद्देश्य ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
कोण्डागांव पुनर्वास केन्द्र निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका
कोण्डागांव जिला प्रशासन द्वारा संचालित पुनर्वास केन्द्र इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां पूर्व में भटके हुए युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास प्रदान किया जा रहा है। यही कारण है कि अब वे अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं और एक नई शुरुआत के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।

