Honey Farming : मधुमक्खी पालन से बढ़ रही किसानों की आय… जशपुर में ‘बीकीपिंग’ बन रहा लाभकारी व्यवसाय

Honey Farming : मधुमक्खी पालन से बढ़ रही किसानों की आय… जशपुर में ‘बीकीपिंग’ बन रहा लाभकारी व्यवसाय

रायपुर, 12 अप्रैल। Honey Farming : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने के लिए मधुमक्खी पालन (बीकीपिंग) को बढ़ावा दिया जा रहा है। जशपुर जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राज्य योजना के तहत 20 किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे इस व्यवसाय को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

अनुदान से मिल रही आर्थिक मजबूती

योजना के अंतर्गत किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक संसाधनों पर अनुदान दिया जा रहा है। इसमें:

  • मधुमक्खी पेटी (बी बॉक्स) व कॉलोनी हेतु ₹1600
  • मधुमक्खी छत्ता के लिए ₹800
  • मधु निष्कासन यंत्र के लिए ₹8000

की सहायता शामिल है। इससे किसान कम लागत में इस व्यवसाय की शुरुआत कर पा रहे हैं।

फसल उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका

मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परागण के माध्यम से फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरसों, आम, लीची, अमरूद, सूरजमुखी, धनिया और सब्जियों में इनके द्वारा परागण से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे खेती अधिक लाभकारी बनती है।

स्वरोजगार का सशक्त माध्यम

मधुमक्खी पालन ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहा है। प्रशिक्षण के बाद इसे आसानी से शुरू किया जा सकता है। शहद, मोम और रॉयल जेली जैसे उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग होने से स्थायी आय के स्रोत विकसित हो रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण में योगदान

मधुमक्खियां जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से इनकी संख्या में कमी आ रही है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में मधुमक्खी-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना आवश्यक हो गया है।

कम निवेश, अधिक लाभ

मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। एक मधुमक्खी बॉक्स से वर्ष में कई बार शहद उत्पादन संभव है। वैज्ञानिक तकनीकों और उचित प्रबंधन से किसान बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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