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CG Bihaan : खीरा की खेती से बदली किस्मत… सुभद्रा बनीं ‘लखपति दीदी’

CG Bihaan: Cucumber Cultivation Transforms Fortunes... Subhadra Becomes a ‘Lakhpati Didi’

CG Bihaan

रायपुर, 11 अप्रैल। CG Bihaan : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के ग्राम करका की रहने वाली सुभद्रा ने अपनी मेहनत और समूह की ताकत से आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। पहले गरीबी से जूझ रही सुभद्रा ने आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत मां सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़कर खीरा की खेती शुरू की और आज “लखपति दीदी” बन चुकी हैं।

समूह से जुड़कर मिली नई दिशा

आदिवासी बहुल गांव करका की सुभद्रा आर्मी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी आजीविका को नया आयाम दिया। समूह के माध्यम से उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने खेती को व्यवस्थित रूप से शुरू किया।

सरकारी योजनाओं से मिला मजबूत सहारा

समूह को शुरुआत में 15 हजार रुपये रिवॉल्विंग फंड, 60 हजार रुपये सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) और 3 लाख रुपये का बैंक ऋण मिला। इस आर्थिक सहायता से खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटाए गए, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। सुभद्रा ने अपनी सफलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार की योजनाओं का आभार व्यक्त किया है।

खीरा की खेती से हो रही नियमित आमदनी

समूह की महिलाओं ने आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए 2 एकड़ भूमि पर खीरा की खेती शुरू की। उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वे हर दूसरे दिन लगभग 10 क्विंटल खीरा बाजार में बेच रही हैं, जिससे उन्हें करीब 7 हजार रुपये की आय हो रही है।

महिलाओं की बदली आर्थिक स्थिति

इस अतिरिक्त आय से न केवल सुभद्रा बल्कि समूह की अन्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं, बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं।

मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

सुभद्रा बताती हैं कि इस सफलता के पीछे समूह की बीमा सखी हबीबुन निशा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता की जानकारी दी और ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने में सहायता की, जिससे खेती को आगे बढ़ाने में मदद मिली। सुभद्रा की मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से आज वे “लखपति दीदी” बनने का गौरव हासिल कर चुकी हैं। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है और यह दर्शाती है कि सही अवसर और प्रयास से आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।

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