रायपुर, 09 अप्रैल। Rehabilitation Linked to Employment : जो हाथ कभी बंदूक उठाकर हिंसा के रास्ते पर थे, आज वही हाथ हुनर और रचनात्मकता की मिसाल बन रहे हैं। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल स्थित पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित नक्सली अब काष्ठ कला और अन्य कौशल के जरिए नया जीवन गढ़ रहे हैं।
हुनर से बन रही नई राह
पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त युवक-युवतियां काष्ठ कला के माध्यम से नेम प्लेट, छत्तीसगढ़ शासन का लोगो, ग्राम पंचायत बोर्ड, की-रिंग और सजावटी सामग्री तैयार कर रहे हैं। इसके साथ ही कपड़े के थैले और कार्यालयीन बस्ते भी बनाए जा रहे हैं, जिससे उनकी आय के साधन विकसित हो रहे हैं।
चौगेल कैंप बना कौशल विकास का केंद्र
कभी बीएसएफ का कैंप रहा चौगेल (मुल्ला) अब कौशल प्रशिक्षण का केंद्र बन चुका है। यहां 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, ड्राइविंग और राजमिस्त्री जैसे विभिन्न रोजगारमूलक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पुनर्वास नीति से मिल रहा सहारा
नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के तहत जिला प्रशासन कांकेर द्वारा कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में यह पहल संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी ध्यान
प्रशिक्षण के साथ-साथ शिक्षण सामग्री, योग्य शिक्षकों की व्यवस्था और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही मनोरंजन के लिए खेल, कैरम और वाद्य यंत्र जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जिससे सकारात्मक माहौल बनता है।
स्वरोजगार की ओर कदम
कृषि, मत्स्य पालन, उद्यानिकी और पशुधन विकास विभागों के सहयोग से कार्यशालाएं आयोजित कर आत्मसमर्पित नक्सलियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ‘बिहान’ के माध्यम से भी उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कांकेर जिला प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला पहला जिला बन गया है। कलेक्टर द्वारा चार युवाओं को निजी क्षेत्र में नियुक्ति पत्र सौंपा गया, जिनमें सगनूराम आंचला, रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल हैं। इन सभी को लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन के साथ अन्य सुविधाएं भी मिल रही हैं। मुख्यधारा में लौटे युवाओं का कहना है कि चौगेल कैंप ने उन्हें नया जीवन दिया है। प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों ने न केवल उनकी जिंदगी बदली है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर भी प्रदान किया है।

