Cultivation of Medicinal Plants : कम लागत में अधिक मुनाफे का नया जरिया… किसानों के लिए बढ़ता आकर्षण

Cultivation of Medicinal Plants : कम लागत में अधिक मुनाफे का नया जरिया… किसानों के लिए बढ़ता आकर्षण

रायपुर, 09 अप्रैल। Cultivation of Medicinal Plants : छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प बनकर उभर रही है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

पारंपरिक खेती छोड़कर अब किसान औषधीय पौधों की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। वन विभाग द्वारा किसानों को निःशुल्क पौधे वितरित किए जा रहे हैं, वहीं घरों की बाड़ी और शहरी क्षेत्रों में हर्बल गार्डन विकसित करने के लिए भी पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बड़े पैमाने पर पौध उत्पादन

छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की पहल से वर्ष 2025-26 में राज्य की 11 नर्सरियों में लगभग 2.8 करोड़ औषधीय पौधे तैयार किए गए हैं, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

विविध औषधीय पौधों का उत्पादन

इन पौधों में वच, ब्राह्मी, सतावर, गुंजा, अनंतमूल, मंडूकपर्णी, स्टीविया, कुलंजन और सर्पगंधा जैसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधे शामिल हैं। इनका उपयोग स्वास्थ्य, आय वृद्धि और जैव विविधता संरक्षण में किया जा रहा है।

सरकार का सहयोग और प्रोत्साहन

वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम और उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला को बधाई दी। सरकार द्वारा सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देकर इस क्षेत्र को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जैविक खेती पर जोर

पौधों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इन्हें पूरी तरह जैविक तरीके से तैयार किया गया है। रासायनिक खाद के बजाय बायो फर्टिलाइजर, गोबर खाद और जीवामृत का उपयोग किया गया, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में मांग भी बढ़ी।

आय और रोजगार के नए अवसर

इस पहल से किसानों और ग्रामीणों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं। औषधीय पौधों की खेती अब रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रही है। बोर्ड ने वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 1 करोड़ नए पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिससे प्रदेश में इनकी उपलब्धता और बढ़ेगी।

राज्य खबर