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Bastar Digital Services : गोलियों से की-बोर्ड तक… बस्तर के कोलेंग में डिजिटल बदलाव की कहानी

Bastar Digital Services: From Bullets to Keyboards... The Story of Digital Transformation in Koleng, Bastar

Bastar Digital Services

रायपुर, 09 अप्रैल। Bastar Digital Services : कभी घने जंगलों और माओवाद की दहशत के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर का चेहरा अब बदल रहा है। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक का कोलेंग गांव, जो कभी नक्सली प्रभाव और दुर्गम रास्तों के कारण विकास से दूर था, आज डिजिटल सशक्तिकरण की मिसाल बन चुका है।

बदली पहचान: डर से विकास तक

जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब की-बोर्ड की टिक-टिक और डिजिटल लेनदेन की आवाज सुनाई देती है। यह बदलाव गांव के ही एक युवा संतोष कुमार की पहल से संभव हुआ है, जिन्होंने शहर जाने के बजाय अपने गांव में रहकर बदलाव लाने का निर्णय लिया।

कॉमन सर्विस सेंटर बना बदलाव का जरिया

पिछले तीन वर्षों से संतोष ग्राम पंचायत कॉम्प्लेक्स में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का संचालन कर रहे हैं। नेटवर्क और संसाधनों की कमी वाले इस क्षेत्र में उन्होंने अपनी मेहनत से ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई हैं।

गांव में ही मिल रहीं जरूरी सेवाएं

अब कोलेंग और आसपास के गांवों—चांदामेटा, मुण्डागांव, छिंदगुर, कांदानार, सरगीपाल और काचीरास—के लोगों को नकदी निकासी, बैंक खाता खोलने या आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए दरभा या जगदलपुर नहीं जाना पड़ता।

दस्तावेज़ सेवाओं से आसान हुआ जीवन

संतोष ई-श्रम कार्ड, किसान पंजीयन, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसी सेवाएं भी गांव में ही उपलब्ध करा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

चुनौतियों के बीच सफलता

नक्सल प्रभाव और नेटवर्क समस्याओं जैसी चुनौतियों के बावजूद संतोष ने अपने मजबूत इरादों से यह साबित किया कि विकास को अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सकता है। इस कार्य से संतोष हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं और आत्मनिर्भर बने हैं। साथ ही, वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों को डिजिटल युग से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। संतोष कुमार की यह पहल न केवल कोलेंग की डिजिटल दूरी को कम कर रही है, बल्कि यह बस्तर के युवाओं में बढ़ते आत्मविश्वास और बदलती सोच का भी प्रतीक है। आज कोलेंग डिजिटल सुविधा और ग्रामीण सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल बन चुका है।

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