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Skill Development : बंदूक से बदलाव तक… नक्सल पुनर्वास नीति से बदली विनोद कुरसम की जिंदगी

Skill Development: From the Gun to Transformation... The Naxal Rehabilitation Policy Changes Vinod Kursam's Life

Skill Development

रायपुर, 08 अप्रैल। Skill Development : छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति अब केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि भटके युवाओं के जीवन में नई रोशनी और अवसर लेकर आ रही है। जहां कभी भय और हिंसा का माहौल था, वहां अब विकास और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई दे रही है।

विनाश से विकास की ओर सफर

बीजापुर जिले के कोकेरा गांव निवासी 27 वर्षीय विनोद कुरसम इस बदलाव की सशक्त मिसाल हैं। अभावों और नक्सल प्रभाव के बीच पले-बढ़े विनोद केवल पांचवीं तक पढ़ पाए। कम उम्र में ही वे नक्सली संगठन से जुड़ गए और बाद में कमांडर तक बने।

आत्मसमर्पण से नई शुरुआत

शासन की योजनाओं और बदलते माहौल से प्रेरित होकर विनोद ने 15 जनवरी 2026 को अपने 30 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं।

कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता

वर्तमान में विनोद दंतेवाड़ा के लिवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे अपने गांव के पास बिजली उपकरण मरम्मत का व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

परिवार के लिए बेहतर भविष्य का संकल्प

विनोद अपने परिवार—माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों—के साथ अब एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। उनका बड़ा बेटा बालक आश्रम में पढ़ाई कर रहा है, जो उनके नए जीवन की दिशा को दर्शाता है। नक्सल पुनर्वास नीति के तहत युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सामाजिक सम्मान मिल रहा है। यह पहल उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित कर रही है।

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