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Father and Son Die : पिता-पुत्र की कस्टोडियल किलिंग मामले में ऐतिहासिक फैसला…! 9 पुलिसकर्मियों को फांसी…इस जघन्य हत्या को हाईकोर्ट ने माना रेयरेस्ट ऑफ रेयर

Father and Son Die: Historic Verdict in Custodial Killing Case of Father and Son...! 9 Police Personnel Sentenced to Death... High Court Declares This Heinous Murder a 'Rarest of the Rare' Case.

Father and Son Die

चेन्नई/तूतीकोरिन, 08 अप्रैल। Father and Son Die : तमिलनाडु के चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल किलिंग मामले में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा दी है। मद्रास हाईकोर्ट मदुरै बेंच ने इस जघन्य मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला करीब छह साल तक चले लंबे ट्रायल के बाद आया है।

क्या था पूरा मामला

19 जून 2020 को तूतीकोरिन जिले (Father and Son Die) के सथानकुलम में कारोबारी पी जयराज और उनके बेटे जे बेन्निक्स को कोविड-19 लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप था कि उन्होंने तय समय के बाद भी अपनी दुकान खुली रखी थी।

जांच में सामने आया कि हिरासत के दौरान दोनों को पूरी रात बेरहमी से पीटा गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ब्लंट फोर्स ट्रॉमा और अत्यधिक रक्तस्राव को मौत की वजह बताया गया।

अमानवीय यातना का खुलासा

चार्जशीट के अनुसार, दोनों को सिर्फ अंडरवियर में मेज पर झुकाकर हाथ-पैर बांध दिए गए थे, ताकि वे हिल न सकें। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने लगातार डंडों से पिटाई की। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दोनों के शरीर पर 18 से ज्यादा गंभीर चोटें थीं, जो उनकी मौत का कारण बनीं।

जांच में क्या मिला

मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। जांच के दौरान थाने की दीवारों, टॉयलेट और अन्य जगहों से लिए गए डीएनए सैंपल पीड़ितों से मेल खाए। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि यह अत्याचार पूर्व नियोजित था और पूरी रात चलता रहा।

अदालत का फैसला

फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट ने सभी आरोपियों को हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग और अत्यधिक क्रूरता इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बनाती है, इसलिए मौत की सजा उचित है।

इस केस में कुल 10 पुलिसकर्मी आरोपी थे, जिनमें से एक की कोविड-19 के दौरान मौत हो चुकी है। बाकी 9 को दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई।

देशभर में था आक्रोश

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में भारी आक्रोश देखने को मिला था। पुलिस हिरासत (Father and Son Die) में होने वाली हिंसा और अत्याचार पर गंभीर सवाल उठे थे। यह फैसला साफ संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कानून लागू करने वाली एजेंसी ही क्यों न हो। साथ ही यह मामला पुलिस कस्टडी में लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस को तेज करता है।

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