RAGI की खेती से महिला किसान बनी मिसाल… शकुन बाई ने कम लागत में कमाया लाखों का मुनाफा

RAGI की खेती से महिला किसान बनी मिसाल… शकुन बाई ने कम लागत में कमाया लाखों का मुनाफा

रायपुर, 05 अप्रैल। RAGI : राज्य और केंद्र सरकार द्वारा रागी, कोदो और कुटकी जैसे लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देने के प्रयास अब जमीन पर असर दिखा रहे हैं। धमतरी विकासखंड के ग्राम उरपुटी की महिला किसान शकुन बाई कुजांम ने रागी की खेती कर प्रगतिशील किसानों में अपनी पहचान बनाई है।

आधुनिक तकनीक से मिली सफलता

शकुन बाई ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक पद्धतियों और नवाचार को अपनाया। 7 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करते हुए उन्होंने आधुनिक उपकरणों—ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, थ्रेसर और रीपर—का उपयोग कर खेती को अधिक प्रभावी बनाया। परिवार के सदस्यों का सहयोग भी उनकी सफलता में अहम रहा।

3 एकड़ में रागी से शानदार उत्पादन

रबी सीजन में उन्होंने 3 एकड़ में ‘छत्तीसगढ़ रागी-2’ किस्म की खेती की।

  • कुल उत्पादन: 28.50 क्विंटल
  • आय: ₹1,48,200 (₹5200 प्रति क्विंटल)
  • लागत: ₹27,000
  • शुद्ध लाभ: ₹1,21,200

बीजोपचार के लिए बीजामृत और खाद के रूप में वर्मी कम्पोस्ट, डीएपी, पीएसबी और केएसबी का उपयोग किया गया।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन से बदलाव

कृषि विभाग के आत्मा कार्यक्रम के तहत उन्हें लगातार तकनीकी मार्गदर्शन मिला। इससे उन्होंने फसल चक्र परिवर्तन और लघु धान्य खेती को सफलतापूर्वक अपनाया।

कलेक्टर ने की सराहना

जिले के कलेक्टर अबिनाश मिश्रा स्वयं शकुन बाई के खेत पहुंचे और उनकी उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने इसे अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया। इस दौरान पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत भी किया गया।

आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी सफलता

शकुन बाई की सफलता यह दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से कम लागत में अधिक लाभ कमाया जा सकता है। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के किसानों के लिए नई दिशा और प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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