दुर्ग, 04 अप्रैल। Water Harvesting : कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार जिले में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बने घरों में मात्र 15 दिनों में 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कर दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
अभियान के चरणबद्ध प्रयास से मिली सफलता
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग दुबे के नेतृत्व में “एकेच गोठ, एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी 2.0” अभियान की शुरुआत 13 मार्च 2025 को हुई।
- पहले चरण में 2 घंटे में 1764 सोक पीट बनाकर गोल्डन बुक में नाम दर्ज
- दूसरे चरण में 12,418 सोक पीट का निर्माण
- कुल 14,182 सोक पीट का निर्माण स्वप्रेरणा से पूरा
जल संरचनाओं का व्यापक निर्माण
अभियान के तहत विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं, जिनमें शामिल हैं:
- 23,889 कंटूर एवं वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच
- 6,676 सोक पीट
- 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं
- 537 रिचार्ज पीट
- 48 गांव तालाब और 9 टैंक
- 15 बोरवेल रिचार्ज, 3 चेकडेम, 7 गली प्लग
- अन्य कई जल संचय कार्य
जनभागीदारी से मिली मजबूती
मनरेगा के माध्यम से इस अभियान में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। लोगों ने श्रमदान कर इसे जन आंदोलन का रूप दिया। अब तक सभी 32,058 संरचनाओं की एंट्री पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है।
भूजल स्तर सुधार की दिशा में बड़ा कदम
इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर सुधारने और स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की जल जरूरतें भी पूरी हो सकेंगी। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर इस अभियान में भाग लें, ताकि जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

