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Neer Chetna Abhiyaan : बालोद में कुसुम खेती की नई शुरुआत…तिलहन उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय

Neer Chetna Abhiyaan: A New Beginning for Safflower Cultivation in Balod... Oilseed Production to Boost Farmers' Income

Neer Chetna Abhiyaan

रायपुर, 04 अप्रैल। Neer Chetna Abhiyaan : शासन की तिलहन प्रोत्साहन योजनाओं और जिला प्रशासन के नीर चेतना अभियान का सकारात्मक असर अब बालोद जिले के खेतों में साफ नजर आ रहा है। कृषि विभाग के प्रयासों से किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ कुसुम (सैफ्लॉवर) की खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।

शून्य से 157 हेक्टेयर तक पहुंचा रकबा

कृषि विभाग के अनुसार, पहले जिले में कुसुम की खेती नहीं होती थी, लेकिन इस वर्ष इसका रकबा बढ़कर 157 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। उन्नत बीज, कतार पद्धति से बुआई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन से फसल बेहतर और लाभदायक साबित हो रही है।

कम पानी में अधिक लाभ

किसानों के अनुसार कुसुम की खेती कई मायनों में फायदेमंद है—

अनुकूल मौसम में इसकी अच्छी पैदावार से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।

37 गांवों के 194 किसानों ने लिया हिस्सा

जिले के सभी विकासखंडों के 37 ग्रामों के 194 किसानों ने पहली बार कुसुम फसल का प्रदर्शन किया है। यह पहल घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बीज उत्पादन से आत्मनिर्भरता की ओर

79 किसानों ने 101 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन के लिए बीज निगम में पंजीयन कराया है। इससे भविष्य में किसानों को स्थानीय स्तर पर ही उन्नत बीज उपलब्ध हो सकेंगे। कृषि विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और कीट प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी हुई है। बालोद के किसानों का यह प्रयास अब आसपास के क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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