रायपुर, 01 अप्रैल। SANKALP : बस्तर अंचल के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को एक और बड़ी सफलता मिली है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 5 माओवादियों—जिनमें 4 महिलाएं शामिल हैं—ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इन सभी पर कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह घटनाक्रम न केवल सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, पुनर्वास और विकास की नीतियां असर दिखाने लगी हैं।
पुलिस लाइन कारली में आत्मसमर्पण, पुनर्वास की ओर बढ़े कदम
पुलिस लाइन कारली में आयोजित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान इन माओवादियों ने औपचारिक रूप से हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का संकल्प लिया। यह पूरी प्रक्रिया ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत संपन्न हुई, जो दंतेवाड़ा जिले में नक्सल प्रभावित युवाओं के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन के एसीएम सोमे कड़ती के साथ लखमा ओयाम, सरिता पोडियाम, जोगी कलमू और मोटी ओयाम जैसे सक्रिय सदस्य शामिल हैं, जो भैरमगढ़ और गंगालूर एरिया कमेटियों से जुड़े हुए थे।
सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी: भारी मात्रा में हथियार बरामद
आत्मसमर्पण के बाद मिली अहम खुफिया जानकारियों के आधार पर सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसमें बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए। इन हथियारों में 8 एसएलआर रायफल, 3 इंसास रायफल, 1 कार्बाइन, 1 .303 रायफल और 5 बीजीएल लॉन्चर सहित कुल 40 घातक हथियार शामिल हैं। यह बरामदगी माओवादी संगठन की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगी।
‘पूना मारगेम’ अभियान से बदल रही बस्तर की तस्वीर
दंतेवाड़ा जिले में वर्ष 2024 से अब तक 607 माओवादियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पुनर्वास केंद्रित नीतियां सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। इसके साथ ही 92 माओवादियों की गिरफ्तारी और 54 माओवादियों के मुठभेड़ में निष्प्रभावी किए जाने की कार्रवाई भी की गई है। दंतेवाड़ा के साथ-साथ बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों से लगातार नक्सल गतिविधियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
शांति, विश्वास और पुनर्वास की ओर मजबूत पहल
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि ‘पूना मारगेम’ अभियान का मुख्य उद्देश्य भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लाकर उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। यह पहल न केवल आत्मसमर्पण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और सामाजिक विश्वास को भी सुदृढ़ कर रही है। कार्यक्रम के दौरान प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें समाज में पुनर्स्थापित करने का भरोसा दिलाया।
बस्तर में बदलती तस्वीर: हिंसा से विकास की ओर बढ़ते कदम
लगातार हो रहे आत्मसमर्पण और पुनर्वास की सफल कहानियां यह दर्शाती हैं कि बस्तर अब धीरे-धीरे हिंसा की छाया से निकलकर विकास, शिक्षा और अवसरों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन न केवल सुरक्षा रणनीतियों का परिणाम है, बल्कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से संभव हो पाया है, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र को एक नई पहचान देने की ओर अग्रसर है।

