रायपुर, 31 मार्च। Barnawapara Wildlife Sanctuary में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी और उत्साहजनक पहल सामने आई है। अभयारण्य स्थित ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर से कुल 34 काले हिरणों (ब्लैकबक) को वैज्ञानिक पद्धति से उनके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की गई, जो राज्य में जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती देती है।
वैज्ञानिक पद्धति से सफल पुनर्स्थापना
काले हिरणों को जंगल में छोड़ने की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तकनीकों और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न हुई। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि हिरणों को किसी प्रकार का तनाव या बाधा न हो। वन विभाग की टीम ने सावधानीपूर्वक योजना बनाकर इस पुनर्स्थापन कार्य को अंजाम दिया, जिससे सभी हिरण सुरक्षित रूप से अपने प्राकृतिक वातावरण में समाहित हो सके।
रामपुर ग्रासलैंड में नया जीवन
प्राकृतिक आवास में छोड़े गए सभी काले हिरण रामपुर ग्रासलैंड क्षेत्र में पहले से मौजूद समूह के साथ जाकर मिल गए। इससे न केवल उनकी संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह कदम वन्यजीवों के प्राकृतिक संतुलन को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विलुप्ति के कगार से वापसी की कहानी
एक समय ऐसा था जब काले हिरण छत्तीसगढ़ की धरती से लगभग विलुप्त हो चुके थे। अब इस तरह के पुनर्स्थापन प्रयासों से वे फिर से अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। यह न केवल वन विभाग की सफलता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
60 ब्लैकबक पुनर्स्थापना का लक्ष्य
वन विभाग ने इस वर्ष कुल 60 काले हिरणों को प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत आगे भी इसी तरह की योजनाबद्ध कार्रवाई जारी रहेगी और छोड़े गए हिरणों की लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि उनकी सुरक्षा और अनुकूलन सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों के मार्गदर्शन में सफल पहल
यह संरक्षण अभियान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण पांडे के मार्गदर्शन, मुख्य वन संरक्षक सतोविशा समझदार के नेतृत्व और वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के सक्रिय प्रयासों से संभव हो पाया। इस दौरान अभयारण्य के अधिकारी, फील्ड बायोलॉजिस्ट और पशु चिकित्सकों सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

