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MNREGA–डीएमएफ से बना चेक डैम बना मिसाल…बरदर गांव में बदली खेती और आजीविका की तस्वीर

MNREGA-DMF Funded Check Dam Sets a Precedent... Transforms the Landscape of Agriculture and Livelihoods in Bardar Village

MNREGA

रायपुर, 30 मार्च। MNREGA : मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में विकास का एक सशक्त मॉडल सामने आया है। यहां मनरेगा और जिला खनिज न्यास (DMF) के अभिसरण से निर्मित चेक डैम ने न केवल जल संरक्षण को मजबूती दी है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और खेती-किसानी की दिशा भी बदल दी है।

19 लाख की लागत, रोजगार का भी सृजन

करीब 19 लाख रुपए की लागत से बने इस चेक डैम में मनरेगा से 17 लाख और डीएमएफ से 2 लाख रुपए का योगदान रहा। निर्माण के दौरान 1070 मानव दिवस सृजित हुए, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिला और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। यह कार्य कलेक्टर डी. राहुल वेंकट और जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

किसानों को मिला सीधा लाभ

चेक डैम बनने से गांव के करीब 15 किसानों को सीधा फायदा मिला है। पहले जहां किसान केवल एक फसल पर निर्भर थे, अब वे धान के साथ दूसरी फसल भी लेने लगे हैं।
सब्जी उत्पादन की ओर भी रुझान बढ़ा है, जिससे किसानों की आय में इजाफा हो रहा है।

जल संरक्षण से बढ़ी खेती की संभावनाएं

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ जल संरक्षण के रूप में सामने आया है। चेक डैम में संचित पानी से भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है। किसान अब सोलर पंप के जरिए सिंचाई कर रहे हैं, जिससे लागत कम हुई है और उत्पादन बढ़ने की संभावना बनी है।

अभिसरण बना सफलता की कुंजी

मनरेगा और जिला खनिज न्यास (DMF) के इस समन्वित प्रयास ने साबित कर दिया है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है।
एक ओर निर्माण के दौरान रोजगार मिला, वहीं स्थायी जल स्रोत ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया। ग्राम पंचायत बरदर का यह चेक डैम अब अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। यह पहल दिखाती है कि सामूहिक प्रयास और सही योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास संभव है।

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