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Korea Model : ‘5 प्रतिशत मॉडल’ बना मिसाल…कोरिया में जल संकट का समाधान…पीएम मोदी ने की सराहना

Korea Model: The ‘5 Percent Model’ Sets a Precedent... A Solution to Korea’s Water Crisis... PM Modi Praises the Initiative.

Korea Model

रायपुर, 30 मार्च। Korea Model : कोरिया जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ के जरिए न केवल जल संकट का समाधान निकाला है, बल्कि सतत विकास की दिशा में भी एक मजबूत उदाहरण स्थापित किया है। यह मॉडल अब राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में कोरिया जिले के किसानों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे नवाचार बड़े बदलाव ला सकते हैं। किसानों द्वारा खेतों में रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर वर्षा जल को रोकने की पहल ने भूजल स्तर सुधारने में अहम भूमिका निभाई है।

क्या है ‘5 प्रतिशत मॉडल’?

‘5 प्रतिशत मॉडल’ के तहत किसानों ने अपनी कृषि भूमि का पांच प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के लिए समर्पित किया। इस पहल के अंतर्गत छोटे-छोटे सीढ़ीदार तालाब, डबरियां और सोखता गड्ढे बनाए गए, जिससे वर्षा जल का अधिकतम उपयोग संभव हो सका। इस मॉडल को जिले के 1200 से अधिक किसानों ने अपनाया और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।

जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी

इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी रही। महिलाओं ने ‘नीर नायिका’ और युवाओं ने ‘जल दूत’ बनकर जिम्मेदारी संभाली। ग्राम सभाओं के माध्यम से योजनाओं का विकेंद्रीकरण किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और क्रियान्वयन की प्रक्रिया मजबूत हुई। इससे यह पहल सरकारी योजना न रहकर जन आंदोलन का रूप लेने लगी।

भूजल स्तर में ऐतिहासिक सुधार

वर्ष 2025 में इस मॉडल के तहत लगभग 2.8 मिलियन क्यूबिक मीटर जल का भूजल में पुनर्भरण किया गया, जो सैकड़ों बड़े तालाबों के बराबर है। छत्तीसगढ़ वॉटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार जिले में भूजल स्तर में 5.41 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

‘आवा पानी झोंकी’ अभियान से बदली स्थिति

करीब 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद कोरिया जिले में पहले पानी का तेजी से बहाव हो जाता था, जिससे भूजल पुनर्भरण नहीं हो पाता था। ‘आवा पानी झोंकी’ अभियान के जरिए इस समस्या का समाधान किया गया और वर्षा जल को रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

मनरेगा और सामुदायिक प्रयासों का समन्वय

वर्ष 2026 तक जिले में 20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण या प्रगति पर हैं। इनमें 17,229 कार्य सामुदायिक स्तर पर और 3,383 कार्य मनरेगा के तहत किए गए हैं। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला, बल्कि ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

कोरिया का यह मॉडल अब देशभर में सराहा जा रहा है। इसे अन्य राज्यों में लागू करने योग्य बताया गया है, जिससे यह जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए मार्गदर्शक बन सकता है। इससे पहले भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में जिले के ‘सोनहनी शहद’ का उल्लेख हो चुका है, जिससे क्षेत्र की पहचान और मजबूत हुई है। जिला कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने इस उपलब्धि का श्रेय किसानों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को दिया। उन्होंने कहा कि जब वैज्ञानिक सोच, प्रशासनिक नेतृत्व और जनभागीदारी एक साथ आती है, तो किसी भी चुनौती का समाधान संभव है। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर बूंद को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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