रायपुर, 29 मार्च। KITG 2026 : खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत आयोजित वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता का भव्य समापन रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में हुआ। देशभर से आए खिलाड़ियों ने अपनी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता को यादगार बना दिया।
टीम चैंपियनशिप के नतीजे
पुरुष वर्ग में अरुणाचल प्रदेश ने ओवरऑल चैंपियन बनकर बाजी मारी, जबकि मिजोरम फर्स्ट रनरअप और असम सेकंड रनरअप रहा।
वहीं महिला वर्ग में असम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चैंपियन का खिताब जीता, जबकि ओडिशा फर्स्ट रनरअप और छत्तीसगढ़ सेकंड रनरअप रहा।
समापन समारोह में शामिल हुए अतिथि
समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और रायपुर महापौर मीनल चौबे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
पुरुष वर्ग के प्रमुख मुकाबले
- 110 किग्रा वर्ग में अरुणाचल प्रदेश के साम्बो लापुंग ने 299 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता।
- मिजोरम के डेविड लालजाव्मडिका (270 किग्रा) ने रजत और छत्तीसगढ़ के लकी बाबू मरकाम (261 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया।
एक अन्य वर्ग में मिजोरम के डेविड जोह्मिंगमाविया ने 290 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक जीता। आंध्र प्रदेश के गुगुलोथु राजा शेखर ने रजत और असम के मनाश प्रतिम सोनवाल ने कांस्य पदक अपने नाम किया।
महिला वर्ग में रोमांचक प्रदर्शन
- 86 किग्रा वर्ग में महाराष्ट्र की साक्षी बंडु बुरकुले ने 150 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक जीता।
- छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने 121 किग्रा उठाकर रजत पदक हासिल किया।
- असम की बिटुपुना देओरी ने कांस्य पदक जीता।
86 किग्रा से अधिक वर्ग में मिजोरम की जोसांगजुआली ने स्वर्ण, असम की पिंकी बोरो ने रजत और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने कांस्य पदक जीता।
छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन
मेजबान छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी दमदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए। लकी बाबू मरकाम का कांस्य पदक घरेलू दर्शकों के लिए गर्व का क्षण रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को आगे बढ़ने का बड़ा मंच देते हैं।
पूरे आयोजन के दौरान तकनीकी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं और प्रतियोगिताएं पारदर्शी तरीके से संपन्न हुईं। दर्शकों के उत्साह ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया।
इस प्रतियोगिता ने एक बार फिर साबित किया कि देश के जनजातीय क्षेत्रों में अपार खेल प्रतिभा मौजूद है, जिसे सही मंच मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

