PM Matsya Sampada Yojana से बदली तस्वीर…युवा किसान बना आत्मनिर्भरता की मिसाल

PM Matsya Sampada Yojana से बदली तस्वीर…युवा किसान बना आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर, 28 मार्च। PM Matsya Sampada Yojana : छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ग्रामीण किसानों के लिए आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत आधार बनती जा रही है। कोंडागांव जिले के ग्राम पल्ली निवासी युवा किसान पाकलू मरकाम ने इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपनी आजीविका को सुदृढ़ किया है, बल्कि सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी भी प्रस्तुत की है।

तालाब निर्माण से शुरू हुई नई दिशा, अनुदान ने बढ़ाया आत्मविश्वास

पाकलू मरकाम ने वर्ष 2023 में इस योजना के अंतर्गत अपनी भूमि पर तालाब निर्माण कराया। लगभग 11 लाख रुपये की लागत वाले इस कार्य में उन्हें 6 लाख 60 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे उनकी आर्थिक चिंता काफी हद तक कम हो गई। इस सहयोग ने उन्हें नए प्रयोग करने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।

तीन तालाबों में विविध मत्स्य पालन, बढ़ी उत्पादन क्षमता और आय

वर्तमान में उनके पास तीन तालाब हैं, जिनमें वे रोहू, कतला, कॉमन कार्प, ग्रास कार्प और पंगास जैसी विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन कर रहे हैं। वैज्ञानिक पद्धति से किए जा रहे इस मत्स्य पालन से उन्हें नियमित और बेहतर उत्पादन मिल रहा है, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।

समन्वित कृषि प्रणाली से आय के कई स्रोत, बना मजबूत आजीविका मॉडल

मछली पालन के साथ-साथ उन्होंने मुर्गी पालन, सूकर पालन और खेती को भी अपने कार्य में शामिल किया है। वे सोनाली और देसी नस्ल की मुर्गियों के साथ असील नस्ल के मुर्गों का पालन कर रहे हैं, जिनकी बाजार में अधिक कीमत मिलती है। इसके अलावा उनके पास लगभग 20 सूकर और खाकी कैंपबेल, इंडियन रनर तथा मोती नस्ल के बत्तख भी हैं, जो उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत बने हुए हैं। साथ ही वे मक्का सहित अन्य फसलों की खेती भी कर रहे हैं।

सालाना आय में उल्लेखनीय वृद्धि, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

समन्वित कृषि प्रणाली अपनाकर पाकलू मरकाम अब सालाना लगभग 6 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी मेहनत और नवाचार ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गए हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि योजनाओं का सही उपयोग और नई सोच अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

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