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KITG 2026 : महिला हॉकी मुकाबलों में टीमों का एकतरफा दबदबा और शानदार जीत का प्रदर्शन

KITG 2026: Teams Display One-Sided Dominance and Spectacular Victories in Women's Hockey Matches

KITG 2026

रायपुर, 28 मार्च। KITG 2026 : खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत राजधानी रायपुर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में आयोजित महिला हॉकी प्रतियोगिता के तीसरे दिन खेले गए मुकाबलों में विभिन्न टीमों का एकतरफा प्रदर्शन देखने को मिला, जहां विजेता टीमों ने शुरू से अंत तक खेल पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखते हुए अपने प्रतिद्वंद्वियों को बड़े अंतर से पराजित किया और अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।

पूरे मैच में बनाए रखा आक्रामक दबाव

पूल ‘ए’ के मुकाबले में मध्य प्रदेश की टीम ने बिहार के खिलाफ बेहद आक्रामक और संतुलित खेल का प्रदर्शन करते हुए 9-0 से एकतरफा जीत दर्ज की। मैच के दौरान मध्य प्रदेश की टीम ने शुरुआत से ही तेज आक्रमण करते हुए बिहार की रक्षा पंक्ति को पूरी तरह भेद दिया और पूरे समय खेल की गति को अपने नियंत्रण में रखते हुए विपक्षी टीम को वापसी का कोई अवसर नहीं दिया।

पूल बी में झारखंड और ओडिशा का दमदार प्रदर्शन 

वहीं पूल ‘बी’ के मुकाबलों में झारखंड और ओडिशा की टीमों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने-अपने मैचों में बड़ी जीत हासिल की। झारखंड ने गुजरात को 16-0 के भारी अंतर से पराजित कर अपनी आक्रामक क्षमता का परिचय दिया, जबकि ओडिशा ने तमिलनाडु को 14-0 से हराकर मैच पर पूर्ण वर्चस्व बनाए रखा। दोनों टीमों ने पूरे मुकाबले के दौरान तेज गति, सटीक पासिंग और मजबूत रणनीति के बल पर विपक्षी टीमों को पूरी तरह दबाव में रखा।

उल्लेखनीय है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का यह पहला संस्करण है, जिसमें देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3,800 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। यह आयोजन जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ-साथ विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा के स्तर को भी नई ऊंचाई दे रहा है।

विभिन्न खेलों में दांव पर 106 स्वर्ण पदक 

इस प्रतियोगिता (KITG 2026) में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती जैसे प्रमुख खेलों में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है। इस आयोजन के माध्यम से न केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि पारंपरिक खेलों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

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