KITG 2026 : एशियाई खेलों में पदक जीतना अब भी सबसे बड़ा लक्ष्य-मीराबाई चानू

KITG 2026 : एशियाई खेलों में पदक जीतना अब भी सबसे बड़ा लक्ष्य-मीराबाई चानू

रायपुर, 27 मार्च। KITG 2026 : टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सेखोम मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के उद्घाटन अवसर पर अपने करियर के सबसे बड़े अधूरे लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि एशियाई खेलों में पदक जीतना आज भी उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी सफलताएं हासिल करने के बावजूद एशियाई खेलों में पदक न जीत पाना उनके लिए एक अधूरा सपना बना हुआ है, जिसे वे हर हाल में पूरा करना चाहती हैं।

चोटों और परिस्थितियों ने कई बार रोका रास्ता, फिर भी जारी है संघर्ष

मीराबाई चानू ने अपने अब तक के सफर को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में उन्होंने पहली बार एशियाई खेलों में भाग लिया था, लेकिन उस समय वे अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं। इसके बाद वर्ष 2018 में पीठ की चोट के कारण वे प्रतियोगिता से बाहर रहीं, जबकि वर्ष 2022 में हिप की चोट ने उनके पदक के सपने को अधूरा छोड़ दिया। लगातार आई इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास जारी रखा, जो उनके दृढ़ संकल्प और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

वजन वर्ग में बदलाव की चुनौती के बीच लक्ष्य साधने की तैयारी

उन्होंने बताया कि आगामी प्रतियोगिताओं में उन्हें अलग-अलग वजन वर्ग में खेलना होगा, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। एक प्रतियोगिता में उन्हें कम वजन वर्ग में उतरना है, जबकि दूसरी में अधिक वजन वर्ग में प्रतिस्पर्धा करनी होगी। इस तरह के बदलाव के लिए शरीर को तैयार करना और प्रदर्शन को संतुलित रखना बड़ी चुनौती है, लेकिन मीराबाई ने इसे अपने लक्ष्य की राह का हिस्सा मानते हुए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया है।

हालिया प्रदर्शन ने बढ़ाया आत्मविश्वास, नए कीर्तिमान किए स्थापित

हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मीराबाई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने अपने वर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है। यह उपलब्धि यह संकेत देती है कि वे आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह तैयार हैं और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत कर रही हैं।

जनजातीय खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच साबित हो रहा आयोजन

इस अवसर पर मीराबाई चानू ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। उनके अनुसार, देश के इन क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें उचित मंच और संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को आगे बढ़ने और अपनी पहचान बनाने का अवसर देते हैं।

आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से खेलों को मिल रही नई दिशा

मीराबाई ने प्रशिक्षण केंद्रों और खेल संस्थानों की भी प्रशंसा की, जहां खिलाड़ियों को उच्च स्तर की सुविधाएं और मार्गदर्शन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के कारण भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर पा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भारतीय खेल और अधिक मजबूत होंगे और खिलाड़ी वैश्विक मंच पर नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।

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