रायपुर, 25 मार्च। Fish-Cum-Poultry Farming : खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए अब किसान पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक और बहुआयामी पद्धतियां अपना रहे हैं। इन्हीं में से एक है एकीकृत मछली-सह-मुर्गी पालन, जो कम लागत में अधिक आय का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
जशपुर के किसान अंकित लकड़ा की प्रेरक पहल
जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने अपनी मेहनत और नई सोच से खेती को नई दिशा दी है। पहले वे केवल वर्षा ऋतु में धान की खेती करते थे, लेकिन अब उन्होंने अपने खेत को बहुआयामी आय का स्रोत बना दिया है।
तालाब और बागवानी से बढ़ी आय
अंकित ने मत्स्य विभाग से मार्गदर्शन लेकर अपने खेत में दो तालाब बनाए। इन तालाबों के पानी का उपयोग वे गर्मी में बागवानी के लिए करते हैं और आम तथा लीची के पेड़ लगाकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। तालाब के किनारों पर लगाए गए पेड़ मिट्टी को कटाव से बचाते हैं और भूमि की गुणवत्ता बनाए रखते हैं।
मुर्गी और मछली पालन का सफल समन्वय
अंकित ने तालाबों के ऊपर शेड बनाकर मुर्गी पालन भी शुरू किया है। मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट मछलियों के लिए आहार का काम करता है, जिससे लागत कम होती है और उत्पादन बढ़ता है। इस शेड में लगभग एक हजार से बारह सौ मुर्गियों की क्षमता है, जिससे नियमित आय सुनिश्चित होती है।
शासकीय योजनाओं से मिला सहयोग
इस पहल को आगे बढ़ाने में प्रधानमंत्री मत्स्य योजना के तहत उन्हें तालाब लाइनर, मोटर, आहार और अन्य आवश्यक संसाधन प्राप्त हुए। साथ ही अनुदान के रूप में आर्थिक सहायता मिलने से इस मॉडल को स्थापित करना आसान हुआ।
किसानों के लिए लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल मॉडल
इस पद्धति को अपनाने वाले किसानों का कहना है कि यह मॉडल न केवल आय बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। एक ही संसाधन से कई प्रकार की आय होने से खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनती है।अंकित लकड़ा की यह सफलता दर्शाती है कि यदि किसान नई तकनीकों और योजनाओं का सही उपयोग करें, तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है, जो कम संसाधनों में अधिक आय प्राप्त करना चाहते हैं।

