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Film Industry : छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को नई उड़ान…! स्क्रिप्ट समिति गठन की दिशा में बड़ी पहल…कला, संस्कृति और सिनेमा के समन्वय पर जोर…स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच

Film Industry: A New Flight for Film Production in Chhattisgarh! A Major Initiative Towards the Formation of a Script Committee... Emphasis on the Synergy of Art, Culture, and Cinema... A New Platform for Local Talent.

Film Industry

रायपुर, 25 मार्च। Film Industry : रायपुर स्थित संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष Mona Sen की अध्यक्षता में स्क्रिप्ट समिति के गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

यह बैठक प्रदेश में फिल्म निर्माण की गुणवत्ता को मजबूत करने और छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत को सिनेमा के माध्यम से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

सिनेमा और संस्कृति के समन्वय पर जोर

संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य ने सिनेमा और संस्कृति के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर अपने सुझाव साझा किए।

विशेषज्ञों की रही सहभागिता

बैठक में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. राजन यादव,ललित कला अकादमी से अभिमन्यु सिन्हा, All India Radio से पद्मश्री डॉ. राधेश्याम तारक, और Doordarshan के कार्यक्रम अधिकारी पी.के. पाठक उपस्थित रहे। विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मुंबई से अभिनेता Bhagwan Tiwari ने भी भाग लिया और फिल्म निर्माण के व्यावहारिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

स्थानीय कहानियों को मिलेगा मंच

बैठक में स्क्रिप्ट समिति की रूपरेखा, कार्यप्रणाली और चयन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। इस समिति का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोककथाओं, ऐतिहासिक प्रसंगों और जनजीवन पर आधारित सशक्त पटकथाओं को प्रोत्साहित करना है।

फिल्म इंडस्ट्री को मिलेगी नई गति

अध्यक्ष मोना सेन ने कहा कि प्रदेश में अपार रचनात्मक संभावनाएं हैं, जिन्हें सिनेमा के माध्यम से मंच देने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने भी स्थानीय कलाकारों, लेखकों और तकनीकी विशेषज्ञों को जोड़कर एक मजबूत फिल्म इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया।

नई पहचान की उम्मीद

इस पहल से छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आने वाले समय में राज्य की सांस्कृतिक पहचान को और व्यापक स्तर पर स्थापित करने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

 

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