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Agricultural Entrepreneurship Training : निश्चय कार्यक्रम के तहत बंदियों को मिला कौशल प्रशिक्षण…आधुनिक खेती की तकनीकों का ज्ञान

Agricultural Entrepreneurship Training: Inmates Receive Skill Training Under the 'Nishchay' Program—Acquiring Knowledge of Modern Farming Techniques.

Agricultural Entrepreneurship Trainin

कोरिया, 24 मार्च। Agricultural Entrepreneurship Training : बैकुंठपुर स्थित जिला जेल में बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत 10 मार्च से 22 मार्च 2026 तक सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को कृषि उद्यमी बनने के लिए आवश्यक व्यावहारिक और वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई। उन्हें मिट्टी परीक्षण, पोषक तत्वों की पहचान तथा पीएच मान जांच जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के बारे में बताया गया, जिससे वे खेती को अधिक प्रभावी और लाभकारी बना सकें।

जैविक खेती की दी गई विस्तृत जानकारी

बंदियों को गोबर से खाद निर्माण, वर्मी खाद, जीवामृत और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उर्वरक और कीटनाशक बनाने की विधियां सिखाई गईं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें प्राकृतिक और कम लागत वाली खेती की ओर प्रेरित करना रहा।

उन्नत खेती तकनीक का प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में भिंडी, करेला, लौकी और टमाटर जैसी फसलों की वैज्ञानिक खेती के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही बीज तैयार करने की उन्नत विधियां और फसलों को रोगों से बचाने के उपाय भी सिखाए गए।

पशुपालन और मत्स्य पालन की जानकारी

कृषि के साथ-साथ बंदियों को बकरी पालन, मछली पालन और मुर्गी पालन का प्रारंभिक प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि वे रिहाई के बाद विभिन्न आय स्रोत विकसित कर सकें।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

इस प्रशिक्षण में कुल 32 बंदियों ने भाग लिया। उन्हें कृषि से जुड़े ऋण और बीमा की जानकारी भी दी गई, जिससे वे भविष्य में आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हों।

प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान

इस कार्यक्रम के सफल संचालन में सहायक जेल अधीक्षक S. K. Abid Raza एवं प्रशिक्षण संस्थान के संचालक महती बनरा का विशेष योगदान रहा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे वे रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे और एक बेहतर जीवन की शुरुआत कर पाएंगे

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