रायपुर, 23 मार्च। World Sparrow Day के अवसर पर 20 मार्च को छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड एवं राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण वेबीनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पर्यावरणविदों, विषय विशेषज्ञों, पक्षी प्रेमियों, प्राध्यापकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
गौरैया संरक्षण पर सामूहिक प्रयास की अपील
वेबीनार के संयोजक मातेश्वरन व्ही., सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड एवं राज्य वेटलैंड प्राधिकरण ने अपने उद्बोधन में गौरैया की लगातार घटती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस नन्हीं चिड़िया के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से इस दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
विशेषज्ञों ने बताए गिरावट के कारण
कार्यक्रम में डॉ. हितनारायण टंडन, सहायक प्राध्यापक, संत गुरु घासीदास शासकीय पीजी महाविद्यालय, कुरूद ने प्रस्तुतीकरण के जरिए गौरैया की घटती संख्या के पीछे के कारणों, संरक्षण उपायों और उनके महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
अनुकूल आवास बनाने पर जोर
द्वितीय वक्ता के रूप में श्री जागेश्वर वर्मा, ई-बर्ड (छत्तीसगढ़) के रिव्यूअर ने गौरैया के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शहरीकरण और प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के उपाय भी साझा किए।
प्रतिभागियों के सवालों का समाधान
वेबीनार के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया। इससे कार्यक्रम और भी संवादात्मक और उपयोगी बन गया।
क्यों मनाया जाता है विश्व गौरैया दिवस?
हर साल 20 मार्च को मनाया जाने वाला World Sparrow Day का उद्देश्य तेजी से घटती गौरैया (House Sparrow) की आबादी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। शहरीकरण, प्रदूषण और बदलते पर्यावरण के कारण इस पक्षी की संख्या में तेजी से कमी आई है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन में गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जैव विविधता से जुड़ी शासकीय पहल को मजबूत करना रहा। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों और आसपास दाना-पानी की व्यवस्था कर इस नन्हीं चिड़िया के संरक्षण में योगदान दें।

