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Seminar Organized : अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर संगोष्ठी…‘हर्बल सेक्टर’ से विकसित छत्तीसगढ़-2047 का रास्ता

Seminar Organized: Symposium on International Day of Forests... The Path to a Developed Chhattisgarh-2047 through the ‘Herbal Sector’

Seminar Organized

रायपुर, 23 मार्च। Seminar Organized : अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा “2047 के विकसित छत्तीसगढ़ लक्ष्य को पूरा करने में हर्बल सेक्टर की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्य वन अनुसंधान परिसर, जीरो पॉइंट रायपुर स्थित बोर्ड कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ।

हर्बल सेक्टर में अपार संभावनाएं

कार्यक्रम में बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती अपनाकर न केवल आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं और आम नागरिकों से हर्बल सेक्टर में आगे आने की अपील की।

“विकसित छत्तीसगढ़-2047” लक्ष्य पर जोर

संगोष्ठी में “विकसित छत्तीसगढ़-2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर्बल सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि यह क्षेत्र भविष्य में आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से अहम साबित हो सकता है।

युवाओं और छात्रों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे हर्बल सेक्टर के प्रति बढ़ती रुचि साफ नजर आई।

योजनाओं और तकनीकों की जानकारी

संगोष्ठी के दौरान बोर्ड की योजनाओं और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। पावरपॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से औषधीय पौधों के संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों की अवधारणा और टिश्यू कल्चर तकनीक से पौधों के संवर्धन के बारे में बताया गया।

वैज्ञानिक खेती और माइक्रोब्स की भूमिका

पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार शुक्ला ने औषधीय पौधों में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) की भूमिका और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगिता पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। इस संगोष्ठी का उद्देश्य हर्बल सेक्टर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना और राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना रहा।

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