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CG Education : “बाल मैत्री (Buddy Buddy)” पहल…बच्चों के लिए स्कूल बना अब दोस्ताना और आसान

CG Education: "Bal Maitri (Buddy Buddy)" Initiative... School Becomes Friendly and Easy for Children

CG Education

रायपुर, 23 मार्च। CG Education : छत्तीसगढ़ में बच्चों के समग्र विकास और सहज शिक्षा वातावरण को बढ़ावा देने के लिए “बाल मैत्री (Buddy Buddy)” कार्यक्रम एक अभिनव पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू यह योजना आंगनबाड़ी से प्राथमिक विद्यालय तक बच्चों के संक्रमण को आसान बना रही है।

क्या है “Buddy Buddy” कार्यक्रम?

“बाल मैत्री (Buddy Buddy)” कार्यक्रम का उद्देश्य 4 से 6 वर्ष के बच्चों को स्कूल के माहौल से पहले ही परिचित कराना है। इसके तहत आंगनबाड़ी के बच्चों को हर महीने नजदीकी प्राथमिक विद्यालयों का भ्रमण कराया जाता है, ताकि वे बिना डर और झिझक के स्कूल जीवन में प्रवेश कर सकें।

शुरुआती उम्र में विकास पर फोकस

विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के पहले छह साल बच्चों के मानसिक और व्यक्तित्व विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। आंगनबाड़ी में खेल-खेल में सीखने वाले बच्चों को जब अचानक स्कूल के औपचारिक माहौल में जाना पड़ता है, तो वे असहज हो जाते हैं। यही अंतर खत्म करने के लिए यह पहल शुरू की गई है।

खेल-खेल में सीख, बढ़े आत्मविश्वास

विद्यालय भ्रमण के दौरान बच्चों को स्कूल परिसर, शिक्षक और अन्य विद्यार्थियों से परिचित कराया जाता है। इस दौरान खेल, गीत, चित्रकला और समूह गतिविधियों के जरिए बच्चों में आत्मविश्वास और मित्रता की भावना विकसित की जाती है।

पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजन

20 मार्च को प्रदेशभर में एक साथ इस कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी बच्चों का विद्यालय भ्रमण कराया गया। सभी स्कूलों में बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और बाल-अनुकूल गतिविधियां आयोजित की गईं।

केंद्र सरकार के निर्देशों से जुड़ी पहल

यह कार्यक्रम PM नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्य सचिव सम्मेलन में दिए गए निर्देशों के अनुरूप शुरू किया गया है, जिसमें आंगनबाड़ी और स्कूलों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया था। राज्य सरकार ने इसे प्रभावी रूप से लागू करते हुए पूरे प्रदेश में विस्तार दिया है। “Buddy Buddy” कार्यक्रम बच्चों के भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास को मजबूत कर रहा है। साथ ही यह पहल स्कूलों को बच्चों के लिए अधिक अनुकूल और आनंददायक बना रही है।

 

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