रायपुर, 21 मार्च। PM Gram Sadak Yojana के तहत अब छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर टिकाऊ और मजबूत सड़कें बनाई जा रही हैं। यह पहल न केवल सड़क निर्माण को बेहतर बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो रही है। इस तकनीक में डामर (बिटुमिन) के साथ लगभग 8 प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट मिलाया जाता है। इससे सड़कें अधिक टिकाऊ बनती हैं और उनकी सर्विस लाइफ भी बढ़ जाती है।
सरगुजा में नवाचार की शुरुआत
Surguja जिले में Swachh Bharat Mission (Gramin) के तहत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देते हुए इस नवाचार को अपनाया गया है। मैनपाट क्षेत्र में पहली प्रयोगात्मक सड़क बनाई गई है, जिसमें प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया गया है।
सुवारपारा प्लांट में तैयार हो रहा मिश्रण
बतौली विकासखंड के सुवारपारा स्थित प्लांट में गिट्टी और डामर के साथ प्लास्टिक वेस्ट मिलाया जा रहा है। यह प्लास्टिक कचरा दरिमा स्थित प्रोसेसिंग सेंटर से लाया जाता है, जिसे सड़क निर्माण में उपयोग किया जा रहा है।
कचरा बना आमदनी का जरिया
जो प्लास्टिक कचरा पहले पर्यावरण के लिए समस्या था, वही अब कमाई का साधन बन गया है। महिला समूहों द्वारा एकत्र किए गए प्लास्टिक को अब 25 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
सड़क निर्माण में बढ़ी गुणवत्ता
अधिकारियों के अनुसार, डामरीकरण की ओजीपीसी लेयर में प्लास्टिक मिलाने से सड़क की मजबूती और टिकाऊपन में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। यह प्रयोग भविष्य में बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।
मैनपाट में 1 किमी सड़क का निर्माण
Mainpat क्षेत्र में लगभग 1 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण में करीब 500 किलो प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग किया गया है। आने वाले समय में इस मॉडल को और व्यापक रूप से लागू करने की योजना है। यह पहल प्लास्टिक कचरे को पुनः उपयोग में लाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद कर रही है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

