रायपुर, 19 मार्च। छत्तीसगढ़ में वन एवं वन्यजीव संरक्षण के तहत वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाघ और तेंदुए के अवैध शिकार में शामिल एक डिप्टी रेंजर सहित कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दंतेवाड़ा और बीजापुर क्षेत्र के जंगलों में की गई।
फंदा लगाकर किया जा रहा था शिकार
वन विभाग को सूचना मिली थी कि कुछ लोग जंगल में फंदे लगाकर वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। इसके बाद विभाग और राज्य उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू की, जिसमें एक संगठित शिकार गिरोह का खुलासा हुआ।
डिप्टी रेंजर की मिलीभगत उजागर
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस अवैध शिकार में वन विभाग का ही कर्मचारी डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम शामिल था। उसकी मिलीभगत से शिकारियों को जंगल में प्रवेश और शिकार करने में मदद मिल रही थी।
फंदे में फंसे बाघ और तेंदुआ
आरोपियों ने लोहे के तार के फंदों में मांस लगाकर बाघ और तेंदुए को फंसाया, जिससे दोनों वन्यप्राणियों की मौत हो गई। बरामद बाघ की उम्र करीब 3 वर्ष बताई गई है।
रायपुर में खाल बेचने की थी योजना
आरोपी शिकार के बाद खाल को रायपुर ले जाकर बेचने की योजना बना रहे थे। पूछताछ के आधार पर ग्राम केशापुर में दबिश देकर तेंदुए की खाल बरामद की गई।
मुख्य आरोपी और गिरफ्तारी
इस मामले में लक्ष्मण तेलाम, देवीराम ओयाम, रमेश कुड़ियाम, फरसोन पोयामी, सेमला रमेश, सुखराम पोडियाम, छत्रू कुड़ियाम सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी को भी पकड़ा गया।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई
वनमंडलाधिकारी दंतेवाड़ा रामकृष्णा ने बताया कि बाघ और तेंदुआ अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्यजीव हैं। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शिकार जैसे गंभीर अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। इस कार्रवाई पर वरिष्ठ अधिकारियों ने टीम को बधाई दी है और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की विस्तृत जांच कर जल्द न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

