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Poshan Abhiyan : कोरबा में स्वचलित मशीनों से बनेगा पोषण आहार…! रेडी टू ईट वितरण शुरू…60 हजार हितग्राही होंगे लाभान्वित…अप्रैल से 5 परियोजनाओं में पहुंचेगा रेडी टू ईट…यहां देखें Video

Poshan Abhiyan: Nutritious Food to be Produced Using Automated Machines in Korba! Distribution of 'Ready-to-Eat' Packs Begins... 60,000 Beneficiaries to Benefit... 'Ready-to-Eat' Supplies to Reach 5 Projects Starting April... Watch Video Here.

Poshan Abhiyan

कोरबा, 18 मार्च। Poshan Abhiyan : छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना के तहत कोरबा जिले में महिला स्व सहायता समूहों को फिर से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कोरबा ग्रामीण परियोजना के बाद अब कोरबा शहरी और पोंडी उपरोड़ा में भी स्वचलित मशीनों के माध्यम से रेडी टू ईट (पूरक पोषण आहार) का निर्माण और वितरण शुरू हो गया है। वहीं करतला और पाली में भी उत्पादन कार्य प्रारंभ हो चुका है, जहां अप्रैल से वितरण शुरू किया जाएगा।

अप्रैल से 5 परियोजनाओं में पहुंचेगा रेडी टू ईट

वर्तमान में तीन परियोजनाओं के 930 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 40 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। आगामी वित्तीय वर्ष की शुरुआत से करतला और पाली के 582 केंद्रों के जरिए लगभग 20 हजार और लाभार्थियों तक यह सुविधा पहुंचेगी। इस तरह जिले की 5 परियोजनाओं में 60 हजार से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और शिशुवती माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है। पहले यह कार्य स्व सहायता समूहों के माध्यम से किया जाता था, लेकिन वर्ष 2022 में इसे स्वचलित मशीनों के जरिए राज्य स्तर पर केंद्रीकृत कर दिया गया था। इससे हजारों महिलाओं का रोजगार प्रभावित हुआ था।

अब शासन ने पुनः चरणबद्ध तरीके से इस जिम्मेदारी को स्थानीय महिला स्व सहायता समूहों को सौंपना शुरू किया है। कोरबा समेत छह जिलों में यह पायलट प्रोजेक्ट लागू किया गया है, जिसके तहत चयनित समूहों को प्रशिक्षण, मशीन स्थापना और गुणवत्ता परीक्षण के बाद उत्पादन की अनुमति दी गई है।

स्वचलित मशीनों के जरिए तैयार रेडी टू ईट पूरी तरह से मानव स्पर्श रहित और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है, जिससे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी पालन सुनिश्चित हो रहा है। जिले में कुल 10 परियोजनाओं के अंतर्गत 2602 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनसे करीब 1.25 लाख हितग्राही लाभान्वित होते हैं। मई माह तक सभी परियोजनाओं में यह व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

निगरानी की जरूरत

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग को सतत निगरानी बनाए रखने की आवश्यकता है। पोषण ट्रैकर ऐप और आधार आधारित एफआरएस प्रणाली के जरिए वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है, लेकिन फर्जीवाड़े की संभावना को रोकने के लिए सख्ती जरूरी होगी।

परियोजनावार चयनित समूह

कोरबा जिले की विभिन्न परियोजनाओं में मां तुलसी, सफुरा माता, जय मां दुर्गा, संतोषी, प्रगति, पार्वती, स्मृति और मां लक्ष्मी जैसे स्व सहायता समूहों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अधिकारी का बयान

जिला कार्यक्रम अधिकारी बसंत मिंज के अनुसार, तीन परियोजनाओं में वितरण शुरू हो चुका है। अप्रैल से पांच और मई तक सभी परियोजनाओं को कवर कर लिया जाएगा। पूरी व्यवस्था पारदर्शी और गुणवत्ता युक्त है। इस पहल से जहां महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं, वहीं जिले के बच्चों और माताओं को बेहतर पोषण भी सुनिश्चित हो रहा है।

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