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CG BIHAAN : महिला स्व-सहायता समूह ने शुरू किया एसी मुर्गी फार्म…अब हर महीने 90 हजार तक की आय

CG BIHAAN: Women's self-help group started AC poultry farm... now earning up to 90 thousand rupees every month

CG BIHAAN

रायपुर, 13 मार्च। CG BIHAAN : महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम एम.के. बाहरा की जय माँ लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। आजीविका मिशन-150 के द्वितीय चरण के तहत समूह द्वारा स्थापित 10 हजार चूजों की क्षमता वाले एयर कंडीशनर मुर्गी फार्म का शुभारंभ जिला स्काउट गाइड के अध्यक्ष एतराम साहू और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार द्वारा किया गया।

पहले मजदूरी पर था निर्भर जीवन

समूह की अध्यक्ष युगेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले समूह की महिलाएं मुख्य रूप से खेती और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती थीं। आय का स्थायी साधन और पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगा।

छोटे स्तर से शुरू हुआ मुर्गी पालन

समूह को एनआरएलएम के तहत 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि मिली, जिससे महिलाओं ने छोटे स्तर पर मुर्गी पालन शुरू किया। इसके बाद उन्हें सामुदायिक निवेश निधि (CIF) से 60 हजार रुपये मिले और बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने क्रमशः 2 लाख और 5 लाख रुपये का उद्यम ऋण भी लिया।

बैंक ऋण से स्थापित किया आधुनिक एसी मुर्गी फार्म

आजीविका को और विस्तार देने के लिए समूह ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर आधुनिक एसी मुर्गी फार्म की स्थापना की। इस कार्य में अध्यक्ष युगेश्वरी साहू के पति सुरेश साहू के मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

हर महीने हो रही 80 से 90 हजार रुपये की आय

आज इस मुर्गी फार्म से समूह को लगभग 80 से 90 हजार रुपये तक मासिक आय प्राप्त हो रही है। इससे महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में काफी सुधार आया है। बढ़ी हुई आय से वे अपने परिवार के पालन-पोषण, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा पर बेहतर खर्च कर पा रही हैं।

समूह की महिलाओं का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें व्यवसाय शुरू करने का साहस, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला है। वे अपने इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं और शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त कर रही हैं।

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