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Jai Nathela Maiya Self Help Group : बिहान से जुड़कर बेदो बाई वर्मा बनीं ‘लखपति दीदी’…950 महिलाओं को भी जोड़ा

Jai Nathela Maiya Self Help Group: By joining Bihaan, Bedho Bai Verma became 'Lakhpati Didi'...also added 950 women

Jai Nathela Maiya Self Help Group

रायपुर, 09 मार्च। Jai Nathela Maiya Self Help Group : खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला के विकासखंड छुईखदान के ग्राम कोहलाटोला की बेदो बाई वर्मा आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आज “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना रही हैं।

स्व-सहायता समूह से शुरू हुआ सफर

बेदो बाई वर्मा वर्ष 2018 में जय नथेला मईया स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, जो फुलवारी ग्राम संगठन के अंतर्गत कार्यरत है। समूह से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति सामान्य थी और परिवार की आय मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी।

एफपीओ से जुड़कर मिली नई पहचान

बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह से ऋण लेकर कृषि कार्य को आगे बढ़ाया और नए अवसरों की तलाश की। वर्ष 2021 में उन्होंने स्वर्ण-उपज महिला किसान उत्पादक कंपनी (FPO) में शेयरधारक के रूप में जुड़कर नई शुरुआत की। अपनी मेहनत और नेतृत्व क्षमता से उन्होंने करीब 950 महिला किसानों को भी इस कंपनी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

खरीदी केंद्र संचालिका के रूप में कर रहीं कार्य

एफपीओ के तहत उन्हें खरीदी केंद्र संचालिका के रूप में जिम्मेदारी मिली। इस कार्य के लिए उन्हें वाइब्रो मशीन, वजन मापक मशीन और टैबलेट जैसे उपकरण दिए गए। वे किसानों से चना, सोयाबीन, मूंग और अरहर की खरीदी बाजार मूल्य पर करती हैं, जिससे उन्हें कमीशन के रूप में आय प्राप्त होती है। अब तक इस कार्य से उन्हें लगभग 2 लाख रुपये की कमीशन राशि मिल चुकी है।

खेती और दुकान से भी बढ़ी आय

बेदो बाई वर्मा गांव में किराना दुकान भी चलाती हैं, जिससे करीब 3 हजार रुपये प्रतिमाह की आय होती है। इसके अलावा वे धान, सोयाबीन और चना की खेती करती हैं तथा घर के उपयोग के लिए जैविक सब्जियों का उत्पादन भी करती हैं।

सालाना आय पहुंची 2.66 लाख रुपये

विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनकी आय में लगातार वृद्धि हुई है। खेती से लगभग 1.5 लाख रुपये, खरीदी केंद्र संचालिका के रूप में करीब 40 हजार रुपये, किराना दुकान से 36 हजार रुपये, जैविक दवाई विक्रय से 12 हजार रुपये, कृषि सखी के मानदेय से 23 हजार रुपये और मास्टर ट्रेनर मानदेय से लगभग 5 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार उनकी कुल वार्षिक आय करीब 2 लाख 66 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।

अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

भविष्य में बेदो बाई वर्मा मुर्गी पालन शुरू करने की योजना बना रही हैं, जिससे उनकी आय और बढ़ेगी। अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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