रायपुर, 06 मार्च। Special Article : मजबूत इरादों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से जीवन की दिशा बदली जा सकती है। बिलासपुर जिले के बिल्हा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत नगपुरा की चित्ररेखा धुरी ने यह साबित कर दिखाया है। सीमित संसाधनों में जीवनयापन करने वाली चित्ररेखा आज गांव में “लखपति दीदी” के नाम से पहचानी जाती हैं।
समूह से मिला सहारा
चित्ररेखा धुरी की आर्थिक स्थिति पहले सामान्य थी। परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना से जुड़े संस्कार समूह ने उन्हें नया रास्ता दिखाया। समूह से ऋण लेकर उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा और संचालन की जिम्मेदारी अपने पति को सौंपी।
बढ़ते गए आय के स्रोत
ई-रिक्शा से नियमित आय शुरू हुई तो चित्ररेखा ने सिलाई कार्य भी आरंभ किया। गांव की महिलाओं और बच्चों के कपड़े सिलकर अतिरिक्त आमदनी कमाने लगीं। इसके साथ ही घर के पास सब्जी बाड़ी तैयार कर मौसमी सब्जियों का उत्पादन और बिक्री शुरू की। तीनों कार्यों से आय के स्रोत मजबूत हुए और धीरे-धीरे उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई। आज वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर हैं।
अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा
चित्ररेखा की सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है। वे बताती हैं कि उन्हें महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है, जिससे छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने में सहूलियत होती है। चित्ररेखा का कहना है कि सरकारी योजनाओं और स्व-सहायता समूह के सहयोग से महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है। आज वे न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।

