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Liquor Policy Case : रिहाई के आंसू…! अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपी बरी…स्पेशल जज ने कहा- इतनी कमजोर चार्जशीट पहले कभी नहीं देखी

Liquor Policy Case: Tears of release! 23 accused, including Arvind Kejriwal and Manish Sisodia, acquitted... Special judge says, "I've never seen such a weak charge sheet before."

Liquor Policy Case

नई दिल्ली, 27 फरवरी। Liquor Policy Case : नई दिल्ली के चर्चित आबकारी नीति (शराब) मामले में तीन साल से जारी अदालती और सियासी लड़ाई के बीच शुक्रवार को बड़ा फैसला आया। राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट को कमजोर बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया। उनके साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के कविता सहित कुल 23 आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां

स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि इतनी कमजोर चार्जशीट उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। अदालत ने माना कि जांच एजेंसियां आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सकीं। समन की वैधानिकता, साक्ष्यों की निरंतरता और कथित मनी ट्रेल पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। अदालत के अनुसार, पैसों के लेनदेन की वह ठोस कड़ी प्रस्तुत नहीं की गई जो आरोप सिद्ध करने के लिए आवश्यक होती है।

क्या थे आरोप?

जांच एजेंसियों ने केजरीवाल को कथित साजिश का “किंगपिन” बताया था। आरोप था कि नई आबकारी नीति में बदलाव कर शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया और इसके बदले रिश्वत ली गई। सीबीआई ने भ्रष्टाचार और प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। ‘साउथ ग्रुप’ के साथ साठगांठ और चुनावी फंडिंग में कथित धन उपयोग के आरोप भी लगाए गए थे।

कथित घोटाले के आंकड़े

मामले में शुरुआत में सैकड़ों करोड़ के राजस्व नुकसान का दावा किया गया था। जांच एजेंसियों ने 100 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत और उसमें से 45 करोड़ रुपये गोवा चुनाव में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया था।

जेल और जमानत की लड़ाई

मामले में मनीष सिसोदिया करीब 17 महीने जेल में रहे, जबकि राज्यसभा सांसद संजय सिंह लगभग 6 महीने तक हिरासत में रहे। अरविंद केजरीवाल को मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने लगभग 5-6 महीने जेल में बिताए। इस दौरान उन्हें अंतरिम जमानत भी मिली। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर जोर देते हुए लंबी हिरासत पर सवाल उठाए थे।

राजनीतिक असर

इस मामले ने दिल्ली की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। विपक्ष, खासकर भारतीय जनता पार्टी ने केजरीवाल पर तीखे हमले किए और उन्हें “भ्रष्टाचार का पोस्टर बॉय” बताया। 2024 लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों सीटों पर AAP-कांग्रेस गठबंधन की हार ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ाईं।

आगे की राह

निचली अदालत से राहत मिलने के बाद AAP इसे बड़ी कानूनी जीत मान रही है। हालांकि सीबीआई ने फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की संभावना जताई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केजरीवाल के लिए दिल्ली की राजनीति में वापसी का अवसर बन सकता है, लेकिन अंतिम कानूनी निष्कर्ष आने तक सियासी बहस जारी रहने की संभावना है।

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