Recruitment Controversy : व्यावसायिक प्रशिक्षक भर्ती विवाद…! 62 अपात्र नियुक्तियों का दावा…RTI से खुलासा…अनुबंध निरस्त करने और FIR की मांग
Shubhra Nandi
Recruitment Controversy
रायपुर, 20 फरवरी। Recruitment Controversy : राज्य परियोजना कार्यालय (समग्र शिक्षा) के अंतर्गत संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम में प्रशिक्षकों की भर्ती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। Lernnet Skills Limited पर भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, अपात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति, वित्तीय अनियमितताओं और दस्तावेजों में कथित हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में मीडिया को एक विस्तृत शिकायत भेजी गई है, जिसमें कंपनी की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए हैं।
कंपनी की पृष्ठभूमि पर उठे सवाल
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि कंपनी पूर्व में IL&FS समूह से संबंधित रही है। वर्ष 2018 में National Company Law Tribunal (NCLT) द्वारा IL&FS को दिवालिया घोषित किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पृष्ठभूमि को देखते हुए कंपनी की वर्तमान कार्यप्रणाली की गहन जांच आवश्यक है। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता
राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा 11 जुलाई 2025 को जारी आदेश में भर्ती के स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए थे। चयन प्रक्रिया को PSSCIVE, भोपाल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया जाना था।
शिकायत के अनुसार, विज्ञापन में Post Graduation in Textile & Clothing जैसी योग्यता मांगी गई थी, जबकि चयन में डिप्लोमा या स्नातक स्तर की योग्यता वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया। आरोप है कि कुल 62 पदों पर अपात्र अभ्यर्थियों की भर्ती की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हुआ है, बल्कि छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
चयन सूची और समय-सीमा पर सवाल
आरोप है कि 30 जुलाई 2025 तक चयन प्रक्रिया पूर्ण कर सूची प्रस्तुत करना अनिवार्य था, लेकिन कंपनी ने निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया। कुछ अभ्यर्थियों को दस्तावेजों के सत्यापन से पहले ही ज्वाइनिंग लेटर जारी करने का भी आरोप लगाया गया है।
साथ ही, स्टेट कोऑर्डिनेटर स्तर पर दस्तावेजों में कथित संशोधन और फेरबदल की शिकायत भी सामने आई है।
50 लाख के व्यय पर संदेह
वर्ष 2023–24 के दौरान औद्योगिक भ्रमण और अतिथि व्याख्यान के नाम पर प्रस्तुत करीब 50 लाख रुपये के बिलों को संदिग्ध बताया गया है। शिकायतकर्ता ने इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की है। विद्यालयों के आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जहां प्रारंभ में 206 विद्यालयों का उल्लेख था, वहीं बाद में संख्या बढ़ाकर 300 कर दी गई। इस विस्तार की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठे हैं।
RTI से बढ़ा विवाद
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेजी सत्यापन और वित्तीय खर्च से जुड़ी कथित विसंगतियों का दावा किया गया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच, कंपनी का अनुबंध समाप्त करने, ब्लैकलिस्ट करने तथा आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। फिलहाल संबंधित विभाग या कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला राज्य की शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।