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BALA : नन्हे कदमों से मजबूत भविष्य…आंगनबाड़ी केंद्र बन रहे बाल शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के केंद्र

BALA: A strong future with small steps... Anganwadi centres are becoming centres of child education and social awareness.

BALA

रायपुर, 15 फरवरी। BALA : भारत का भविष्य जिन नन्हे कदमों पर आगे बढ़ता है, वे आज देशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा और मुस्कान के साथ नई दिशा पा रहे हैं। कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्र आज प्रारंभिक बाल शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक चेतना और ग्रामीण रोजगार के बहुआयामी केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलों में दिखाई दे रहा यह परिवर्तन अब राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित हो रहा है।

भवन ही शिक्षक: ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की जीवंत अवधारणा

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिशरण से निर्मित नवीन आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार कर दिया है।11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक भवन में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों, दरवाजों और खुली जगहों को शिक्षण माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु, स्थानीय परिवेश और सामान्य ज्ञान से जुड़ी चित्रकारी बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर प्रदान कर रही है।अब आंगनबाड़ी भवन स्वयं एक शिक्षक बन चुके हैं जहाँ हर दीवार एक पाठशाला है।

धमतरी का बाला मॉडल 

प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में धमतरी जिले का बाला मॉडल एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर उभरा है। मनरेगा, महिला एवं बाल विकास विभाग (ICDS) और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से जिले में 81 बाला आधारित आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण प्रारंभ किया गया है, जिनमें से 51 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं।विकासखंड धमतरी के ग्राम उड़ेंना में निर्मित आंगनबाड़ी केंद्र इसका सशक्त उदाहरण है, जहाँ दृश्य-आधारित शिक्षण से विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे सहज रूप से ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ, भाषा चार्ट, फर्श पर रंग-आकार और सीढ़ियों पर गिनतीकृहर संरचना बच्चों में जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और सीखने की रुचि बढ़ा रही है।

शिक्षा के साथ रोजगार का सृजन

इन आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण मनरेगा के अंतर्गत होने से एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का विकास हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को स्थायी रोजगार मिला है। मजदूरी से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और पलायन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। इस प्रकार आंगनबाड़ी निर्माण केवल बाल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का भी सशक्त मॉडल बन गया है।
खेल-खेल में शिक्षा से खिलखिलाता बचपन
महासमुंद के शहरी सक्षम केंद्रों से लेकर नारायणपुर के सुदूर वनांचल के ग्राम कुंदला तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में आया यह बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। रंग-बिरंगी दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ, खेल सामग्री और बच्चों की खिलखिलाती हँसी ने आंगनबाड़ी को आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा वातावरण प्रदान किया है। बच्चे भाषा, गणित और व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीख रहे हैं और स्वयं उत्साह के साथ केंद्र आ रहे हैं। पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक चेतना का केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र आज बच्चों तक सीमित न रहकर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श का प्रमुख केंद्र बन गए हैं।दीवारों पर अंकित संदेश “जितनी अच्छी वजन की रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और“लड़का-लड़की एक समान”आंगनबाड़ी को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी मंच भी बना रहे हैं।
कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रभावी रूप से हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं के अधिकारों को संस्थागत मजबूती मिल रही है। स्वच्छता, सुरक्षा और सामुदायिक सहभागिता आरओ जल व्यवस्था, स्वच्छ रसोई, खेलघर, पर्याप्त खेल सामग्री और नियमित साफ-सफाई ने आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षित और बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय सहभागिता से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की निरंतरता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर सशक्त कदम आंगनबाड़ी केंद्रों का यह रूपांतरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है।11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन आज बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार सृजन का समन्वित मॉडल बन चुका है।आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार एक साथ मिलकर सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की मजबूत नींव रख रहे हैं।
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