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Mahua and Millets : रायपुर साहित्य उत्सव में ‘जशप्योर’ का जलवा…महुआ और मिलेट्स से बने जशप्योर उत्पादों को मिली शानदार प्रतिक्रिया

Mahua and Millets: 'Jashpure' shines at the Raipur Literature Festival... Jashpure products made from mahua and millets received a fantastic response.

Mahua and Millets

रायपुर, 25 जनवरी। Mahua and Millets : रायपुर में आयोजित भव्य साहित्य उत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला और संस्कृति के साथ-साथ जशपुर जिले का गृह ब्रांड ‘जशप्योर’ (Jashpure) आगंतुकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री के आदिवासी एवं महिला उत्थान के विजन से प्रेरित यह ब्रांड पारंपरिक स्वादों को आधुनिक बाजार से जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रहा है।

उत्सव परिसर में लगाए गए जशप्योर के स्टॉल पर दिनभर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। विशेष रूप से महुआ से बने लड्डू, कुकीज़ और कैंडी आगंतुकों के बीच चर्चा का विषय बने रहे। स्टॉल पर आने वाले लोग न केवल उत्पादों के स्वाद और गुणवत्ता की सराहना कर रहे हैं, बल्कि लगाए गए QR कोड के माध्यम से इनके पोषण मूल्य और निर्माण प्रक्रिया की जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं।

रायपुर की स्थानीय निवासी निधि साहू ने स्टॉल का भ्रमण करने के बाद कहा,“यह जानकर आश्चर्य हुआ कि महुआ से इतने स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। पारंपरिक ज्ञान का यह आधुनिक उपयोग वास्तव में सराहनीय है।”

जशप्योर से जुड़े युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि महुआ को लेकर लंबे समय से समाज में यह धारणा रही है कि इसका उपयोग केवल शराब निर्माण तक सीमित है, लेकिन जशप्योर इस सोच को बदलने का कार्य कर रहा है।उन्होंने कहा,“जशपुर की महिलाएं अब फूड-ग्रेड महुए का उपयोग कर इसे एक पारंपरिक सुपरफूड के रूप में स्थापित कर रही हैं। यह पहल आदिवासी महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है।”

विविधता और आधुनिकता का संगम

जशप्योर ब्रांड के अंतर्गत वर्तमान में 90 से अधिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। महुआ के साथ-साथ ग्लूटेन-फ्री मिलेट्स से बने बिस्किट और लड्डू भी लोगों को खासे पसंद आ रहे हैं। इनमें रागी, कुटकी, कोदो और बकव्हीट जैसे पोषक मिलेट्स से तैयार विविध उत्पाद शामिल हैं।

महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

जशप्योर केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि महिला आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की एक अभिनव पहल है। स्थानीय संसाधनों के कुशल उपयोग से जशपुर की ग्रामीण महिलाएं आज न केवल स्थायी रोजगार प्राप्त कर रही हैं, बल्कि उद्यमिता के क्षेत्र में भी सशक्त रूप से आगे बढ़ रही हैं। रायपुर साहित्य उत्सव में जशप्योर की यह प्रभावशाली उपस्थिति छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों और महिला सशक्तिकरण की बढ़ती पहचान का सशक्त प्रमाण है।

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