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Prayagraj Mela : प्रयागराज माघ मेले में विवाद…! स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने थमाया नोटिस

Prayagraj Mela: Controversy at the Prayagraj Magh Mela...! Swami Avimukteshwaranand served with a notice by the administration.

Prayagraj Mela

प्रयागराज, 20 जनवरी। Prayagraj Mela : संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले का विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले चुका है। मौनी अमावस्या के दिन हुए हंगामे के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्राधिकरण ने कड़ा नोटिस थमाया है। इसमें उनके ‘शंकराचार्य’ संबोधन की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं और उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

क्या है नोटिस में कहा गया

प्रशासन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ‘ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य’ के रूप में कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह मामला अभी इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। नोटिस में पूर्व हाईकोर्ट आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया कि जब तक न्यायालय इस विषय में कोई अंतिम आदेश नहीं देता, तब तक कोई भी धर्माचार्य आधिकारिक रूप से इस पीठ का शंकराचार्य नहीं कहल सकता।

मौनी अमावस्या का विवाद

सूत्रों के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और अन्य मेला अधिकारियों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की तीखी बहस हुई। इस दौरान कथित तौर पर अधिकारियों ने शिष्यों के साथ मारपीट भी की। इससे आहत होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम में पवित्र स्नान करने से मना कर दिया और विरोध स्वरूप धरने पर बैठ गए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रुख

अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि प्रशासन का व्यवहार अपमानजनक था। उनकी मांग है कि जब तक संबंधित अधिकारी माफी नहीं मांगते और उन्हें सम्मानपूर्वक संगम स्नान नहीं कराते, तब तक वे धरना जारी रखेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि माघ मेले की पूर्णिमा तक वे अपने शिविर के बाहर ही रहेंगे और भविष्य में भी इसी तरह का रुख अपनाएंगे।

कानूनी पहलू

प्रशासन का तर्क है कि विचाराधीन मामले के दौरान इस गरिमामय पद का उपयोग करना नियमों के विरुद्ध हो सकता है। नोटिस अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर देता है।

 

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