Site icon AB News.Press

Promotion Rules : DIG जेल पदोन्नति पर हाईकोर्ट की सख्ती…! नियमों के खिलाफ बताकर आदेश रद्द

Big Promotion: 45 officers and employees promoted...! The General Administration Department has released the list... See it here!

Big Promotion

रायपुर, 17 जनवरी। Promotion Rules : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जेल विभाग में की गई एक महत्वपूर्ण पदोन्नति को अवैध करार देते हुए प्रशासनिक प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने DIG (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल) जेल पद पर की गई पदोन्नति को नियमों के विरुद्ध मानते हुए न केवल पदोन्नति आदेश निरस्त किया, बल्कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जेल अधीक्षक के दायर याचिका पर फैसला

यह फैसला जेल अधीक्षक अमित शांडिल्य द्वारा दायर याचिका पर सुनाया गया। कोर्ट ने 9 मार्च 2023 को एस.एस. तिग्गा के पक्ष में जारी DIG जेल पदोन्नति आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही 26 अप्रैल 2023 को अमित शांडिल्य की अभ्यावेदन खारिज करने का आदेश और 8 फरवरी 2023 की DPC की सिफारिशें भी निरस्त कर दी गईं।

वरिष्ठता नहीं, मेरिट होगी आधार

अपने विस्तृत निर्णय में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित पद पर पदोन्नति “मेरिट-कम-सीनियरिटी” के सिद्धांत के आधार पर की जानी थी। ऐसे मामलों में DPC का वैधानिक दायित्व है कि वह सभी पात्र अधिकारियों की तुलनात्मक मेरिट का आकलन करे, जिसमें सेवा अभिलेख, वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR), कार्य प्रदर्शन, दक्षता और अन्य प्रासंगिक पहलुओं का समग्र मूल्यांकन शामिल हो। कोर्ट ने कहा कि केवल यह कहना कि सभी पात्र अधिकारियों को “Very Good” ग्रेड प्राप्त है, मेरिट मूल्यांकन से बचने का आधार नहीं हो सकता। DPC का कर्तव्य था कि वह यह निर्धारित करे कि इन अधिकारियों में तुलनात्मक रूप से कौन अधिक मेधावी है। न्यायालय ने माना कि इस मामले में DPC ने तुलनात्मक मेरिट का कोई आकलन नहीं किया और सीधे वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की सिफारिश कर दी, जो नियमों और स्थापित सेवा न्यायशास्त्र के विपरीत है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “मेरिट-कम-सीनियरिटी” सिद्धांत में मेरिट को प्राथमिकता दी जाती है। वरिष्ठता तभी निर्णायक हो सकती है, जब सभी उम्मीदवार समान मेरिट के पाए जाएं। इस प्रकरण में ऐसा कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया था। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चार माह के भीतर नई DPC का गठन कर सभी पात्र अधिकारियों का निष्पक्ष, पारदर्शी और तुलनात्मक मेरिट-आधारित मूल्यांकन किया जाए। यदि इस प्रक्रिया में अमित शांडिल्य अधिक योग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें नियमानुसार DIG पद पर पदोन्नति और सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं। यह निर्णय केवल जेल विभाग तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि राज्य की समस्त सेवा पदोन्नति प्रक्रियाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक के रूप में देखा जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पदोन्नति में यांत्रिक रूप से वरिष्ठता लागू करना स्वीकार्य नहीं है और वास्तविक मेरिट मूल्यांकन अनिवार्य है।
Exit mobile version