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Flower Exhibition 2026 में औषधीय पौधों की विशेष झलक…औषधि पादप बोर्ड के स्टॉल पर लोगों की खास रुचि

The Flower Exhibition 2026 will feature a special display of medicinal plants... attracting significant interest from visitors at the Medicinal Plants Board's stall.

Flower Exhibition 2026

रायपुर, 15 जनवरी। Flower Exhibition 2026 : राजधानी स्थित नेहरू-गांधी उद्यान में 09 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित प्रदेश स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी में वन विभाग की ओर से छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने सक्रिय भागीदारी की। प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में फूल, फलों, सब्जियों और बोनजाइ सहित कई प्रजातियों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इसी दौरान बोर्ड द्वारा लगाए गए स्टॉल में छत्तीसगढ़ के वनों में मिलने वाले 50 स्थानीय औषधीय एवं सुगंधित पौधों का सजीव प्रदर्शन किया गया, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र था, जिसने प्रदर्शनी में आए प्रत्येक दर्शक का ध्यान अपनी ओर खींचा।

औषधि पादप बोर्ड और छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के स्टॉल हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे हैं क्योंकि वे औषधीय पौधों की प्रदर्शनी, मुफ्त वितरण, और उनके महत्व के बारे में जानकारी देकर लोगों को जागरूक करते हैं, खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में, जहाँ जैव विविधता और पारंपरिक औषधियों को बढ़ावा दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कि औषधि पादप बोर्ड के कर्मियों ने दर्शकों को विस्तार से जानकारी दी कि कौन सा पौधा किस बीमारी में उपयोगी है। पौधों का वैज्ञानिक नाम क्या है, किस भाग का उपयोग किया जाना चाहिए और सही मात्रा व उपयोग का समय क्या होना चाहिए। यह जानकारी बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों सभी के लिए बेहद उपयोगी रही। प्रदर्शनी के दौरान आमजनों को रोजमर्रा की छोटी बीमारियों में काम आने वाले औषधीय पौधों की पहचान और उपयोग की जानकारी भी दी गई।

इसके साथ ही बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं होम हर्बल गार्डन (निःशुल्क औषधीय पौधा वितरण) तथा औषधीय एवं सुगंधित पौधों के कृषिकरण को बढ़ावा देने जैसे नवाचार से भी लोगों को अवगत कराया गया। इस प्रदर्शनी में लगभग 50 हजार से अधिक लोगों ने बोर्ड द्वारा लगाए गए इस औषधीय पौधों के प्रदर्शन को देखा और सराहा। साथ ही आमजनों को जानकारी बढ़ाने हेतु प्रचार सामग्री भी वितरित की गई। यह पहल राज्य में पारंपरिक वन-औषधि ज्ञान को बढ़ावा देने और लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

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