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National Horticulture Mission and State Plan : मीठी क्रांति से बदलता किसानों का भविष्य…मधुमक्खी पालन, बिना भूमि के भी आत्मनिर्भरता की राह

National Horticulture Mission and State Plan: The sweet revolution is changing the future of farmers... Beekeeping, a path to self-reliance even without land.

National Horticulture Mission and State Plan

रायपुर, 10 जनवरी। National Horticulture Mission and State Plan : राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राज्य योजना के अंतर्गत मीठी क्रांति याने मधुमक्खी पालन योजना से प्रदेश के किसानों का भाग्य बदल रहा है। यह योजना किसानों को कम लागत में अधिक लाभ देने वाला वैकल्पिक व्यवसाय बनकर उभरा है। किसानों की आय बढ़ाने एवं ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग के द्वारा किसानों को खेती के साथ मधुमक्खी पालन करने को बढ़ावा दिया जा रहा है। गौरतलब है कि मधुमक्खी पालन गांव स्तर पर रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बन रहा है। यह व्यवसाय ना केवल किसान बल्कि युवा एवं महिलाओं द्वारा स्वरोजगार हेतु प्रारंभ किया गया है और इससे वे अतिरिक्त आय अर्जित कर आत्मनिर्भर हो रहे हैं।

कम श्रम और सरल प्रक्रिया के कारण महिला और बेरोजगार युवा के लिए मधुमक्खी पालन आसान

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के लघु, सीमांत एवं भूमिहीन किसान भी इस व्यवसाय को बिना अतिरिक्त भूमि के प्रारंभ कर सकते हैं। 5 से 10 मधुमक्खी बक्सों से भी यह कार्य सफलतापूर्वक किया जा सकता है। कम श्रम और सरल प्रक्रिया के कारण महिला और बेरोजगार युवा भी मधुमक्खी पालन को आसानी से अपना सकते हैं। शासन द्वारा मधुमक्खी बक्से पर दिया जा रहा अनुदान (सब्सिडी) इस व्यवसाय को और सुलभ बना रही है।

हिग्राहियों को अनुदान

योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को मधुमक्खी पेटी (बी बॉक्स) मय कॉलोनी हेतु राशी रुपये 4000 की इकाई लागत पर राशी रुपये 1600 का अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा मधुमक्खी छाता हेतु राशी रुपये 2000 की इकाई लागत पर राशि रुपये 800 का अनुदान तथा मधु निकासन यन्त्र पर राशि 20 हजार रुपये की इकाई लागत पर 8 हजार रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। वहीं राज्य योजना अंतर्गत मधुमक्खी के छाते (कॉलोनी) एवं मधुमक्खी पेटिका के प्रति नग लागत राशि 2000 रुपए पर 50 प्रतिशत अथवा एक हजार रुपए जो भी कम हो वह दिया जाता है।

2382 किसान अनुदान से लाभान्वित

अधिकारियों ने बताया कि योजनांतर्गत मधुमक्खी पालन करने वाले प्रत्येक कृषक निर्धारित मापदंड अनुसार न्यूनतम 5-5 नग एवं अधिकतम 50-50 नग तक मधुमक्खी के छाते (कॉलोनी) एवं पेटिका हेतु पात्र होंगे। विभाग द्वारा केंद्र एवं राज्य योजना के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में अद्यतन 2382 किसानों को अनुदान देकर लाभान्वित किया गया है।

मधुमक्खी पालन हेतु किसानों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन

मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, यह एक ऐसा लाभकारी व्यवसाय है, जिसमें शहद के अलवा मोम, रॉयल जेली एवं प्रोपोलिस जैसे बहुमूल्य उत्पाद प्राप्त होते हैं। कृषि उत्पादन बढाने में मधुमक्खी पालन की अहम् भूमिका है। मधुमक्खियों द्वारा किये गए परागण से फल, सब्जी आदि फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। आम, अमरुद, सूरजमुखी, धनिया, सब्जी फसलों और जंगली फूल मधुमक्खियों के लिए उत्तम पुष्प स्त्रोत माने जाते है। वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन अपनाने हेतु किसानों को निरंतर प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं जागरूकता प्रदान की जा रही है।

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