रायपुर, 31 दिसंबर। Strike : छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारी एवं अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशभर में चल रही तीन दिवसीय हड़ताल का आज 31 दिसंबर को अंतिम दिन रहा। राजधानी रायपुर के इनडोर स्टेडियम सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली है कि सरकार संवाद करना चाहती है। यदि ऐसा है तो संगठन बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन फेडरेशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी 11 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
हड़ताल के अंतिम दिन रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा भी मंच पर मौजूद रहे। वहीं फेडरेशन के संभाग प्रभारी चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति के लिए ब्यूरोक्रेसी और सरकार दोनों जिम्मेदार हैं। अधिकारियों द्वारा फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी और सरकार द्वारा कर्मचारियों के हित में निर्णय लेने में सुस्ती के कारण यह स्थिति बनी है।
फेडरेशन ने बताया कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को देय तिथि से अब तक महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा लंबित एरियर्स एवं अन्य सुविधाएं भी अटकी हुई हैं, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों में भारी नाराजगी है।
संगठन की मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान DA एवं DR दिया जाए तथा वर्ष 2019 से लंबित एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित की जाए।
फेडरेशन की प्रमुख मांगों में अनुकंपा नियुक्ति नियमों में शिथिलता, संविदा, दैनिक वेतनभोगी एवं अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, वेतन विसंगतियों का निराकरण तथा समान कार्य के लिए समान वेतन शामिल हैं।
कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन ने दो टूक कहा है कि संगठन संवाद के लिए तैयार है, लेकिन यदि सरकार ने जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया तो प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

