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Hindi Poetry : प्रख्यात हिंदी कवि नासिर अहमद सिकंदर का निधन…! साहित्य जगत में शोक की लहर

Hindi Poetry: Renowned Hindi poet Nasir Ahmed Sikandar passes away...! A wave of grief in the literary world.

Hindi Poetry

भिलाई, 29 दिसंबर। Hindi Poetry : हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर और छत्तीसगढ़ के साहित्यिक आंदोलन के निरंतर साधक नासिर अहमद सिकंदर का आज सुबह 8 बजे हृदयाघात से निधन हो गया। वे 63 वर्ष के थे। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

15 जून 1961 को जन्मे नासिर अहमद सिकंदर पिछले चार दशकों से हिंदी कविता में सक्रिय थे। वे भिलाई में निवासरत थे और भिलाई स्टील प्लांट से सेवा निवृत्त होने के बाद भी साहित्य साधना में पूरी तरह सक्रिय रहे। विगत कुछ वर्षों से वे शारीरिक व्याधियों से जूझ रहे थे।

नासिर अहमद सिकंदर न केवल एक प्रतिबद्ध कवि थे, बल्कि छत्तीसगढ़ के नवोदित कवियों के मार्गदर्शक भी रहे। उन्होंने दैनिक समाचार पत्र के साहित्य पृष्ठ का संपादन कर अनेक युवा रचनाकारों को लेखन और प्रकाशन का संबल दिया तथा उन्हें बेहतर काव्य लेखन की ओर प्रेरित किया।

उनकी प्रमुख काव्य कृतियों में “भूल वश और जानबूझ कर”, “इस वक्त मेरा कहा”, “जो कुछ भी घट रहा है दुनिया में” शामिल हैं। इसके अलावा लेखकों से बातचीत पर आधारित “कुछ साक्षात्कार” तथा कविता की समीक्षात्मक पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

वे अपनी जनवादी रुझान वाली रचनाओं के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। पिछले दो दशकों से वे स्थानीय नवोदित कवियों को साहित्य की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे थे। वे जनवादी लेखक संघ छत्तीसगढ़ की केंद्रीय समिति के सदस्य रहे और संगठन में दो कार्यकाल तक राज्य महासचिव की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे।

जनवादी लेखक संघ छत्तीसगढ़ ने उनके निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। संगठन ने कहा कि नासिर अहमद सिकंदर की जनपक्षधर रचनाएं और साहित्यिक योगदान हमेशा याद किए जाएंगे।

उनका अंतिम संस्कार आज 29 दिसंबर को शाम 4:00 बजे रामनगर कैंप-1, भिलाई कब्रस्तान में किया गया। साहित्य जगत ने एक सजग, संवेदनशील और प्रतिबद्ध रचनाकार को खो दिया

नासिर अहमद सिकंदर : संक्षिप्त परिचय

नासिर अहमद सिकंदर हिंदी कविता के एक महत्वपूर्ण और जनवादी चेतना से जुड़े कवि, आलोचक एवं संपादक थे। उनका जन्म 15 जून 1961 को हुआ। उन्होंने बी.एससी (गणित) तक शिक्षा प्राप्त की। वे लंबे समय तक भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्ति के बाद भी साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।

प्रकाशित पुस्तकें

साहित्यिक योगदान

उनके आलेख, समीक्षाएं, रिपोर्ताज और फीचर देश की कई महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। उन्होंने दैनिक नवभारत में छत्तीसगढ़ के युवा कवियों की कविताओं पर आधारित स्तंभ ‘अभी बिल्कुल अभी’ तथा साक्षात्कार श्रृंखला ‘आमने-सामने’ का संपादन किया। पत्रिका ‘समकालीन हस्ताक्षर’ के केदारनाथ अग्रवाल और चंद्रकांत देवताले पर केंद्रित दो विशेष अंकों का संपादन भी किया। हाल के वर्षों में वे कवि संतोष चतुर्वेदी के ब्लॉग ‘पहली बार में’ युवा कवियों की रचनाओं पर नियमित टिप्पणी और प्रस्तुति कर रहे थे।

सम्मान

वर्तमान/अंतिम निवास

मोगरा 76, तालपुरी, भिलाईनगर
जिला – दुर्ग (छत्तीसगढ़)

नासिर अहमद सिकंदर अपनी जनवादी रचनाशीलता, आलोचनात्मक दृष्टि और युवा रचनाकारों के सतत मार्गदर्शन के लिए हिंदी साहित्य में हमेशा स्मरण किए जाएंगे।

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