रायपुर, 16 दिसंबर। CG Assembly : विधानसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पहले आशासकीय संकल्प पारित किया गया था कि कोई खदान नहीं खोली जाएगी, इसके बावजूद प्रदेश में जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है।
भूपेश बघेल ने कहा कि सरगुजा से लेकर बस्तर तक जंगलों की कटाई जोरों पर है, इसी गंभीर मुद्दे को लेकर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री द्वारा सदन में गलत जानकारी दी गई, और जब गंभीर सवाल पूछे गए तो सरकार बस्तर ओलंपिक और गुरु घासीदास अभ्यारण्य जैसे विषयों की बात करने लगी, जो मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
जंगल कटाई और मानव-हाथी द्वंद्व पर सरकार को घेरा
उन्होंने कहा कि सरकार की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गंभीर विषय पर चर्चा के बजाय ध्यान भटकाया गया, जिसके विरोध में विपक्ष को गर्भगृह जाकर स्वयं को निलंबित कराना पड़ा।
पूर्व सीएम ने कहा कि प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि दिल्ली में फ्लाइट तक कैंसिल करनी पड़ी, और छत्तीसगढ़ भी उसी दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सोलर ऊर्जा की व्यवस्था मौजूद है, तो फिर कोयला उत्खनन क्यों किया जा रहा है।
भूपेश बघेल ने कहा कि खनन के कारण मानव-हाथी द्वंद्व बढ़ रहा है, और छत्तीसगढ़ को केवल प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति पूरे छत्तीसगढ़ के लिए त्रासदी साबित हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ दो उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है, और जहां-जहां खदानें खोली जा रही हैं वहां ग्राम सभाएं तक नहीं कराई गईं। कुछ मामलों में दूरस्थ गांवों में ग्राम सभा कर 15 मिनट में औपचारिकता पूरी कर दी गई।
भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी हैं, इसके बावजूद आदिवासी क्षेत्रों का खनन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की खनिज संपदा को लूटने का काम किया जा रहा है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।

