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Digital Museum : आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है देश का पहला डिजिटल संग्रहालय

Digital Museum: India's first digital museum is dedicated to tribal heroes.

Digital Museum

रायपुर, 30 अक्टूबर। Digital Museum : छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से वीरता और बलिदान की गाथाओं से गूंजती रही है। जिस तरह भगवान बिरसा मुंडा ने देशभर के आदिवासी समाज में आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना जगाई, उसी प्रकार सोनाखान के जमींदार शहीद वीर नारायण सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने शोषण और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई और मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद कहा जाता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वीर नारायण सिंह सहित उन सभी आदिवासी नायकों की स्मृतियों को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक उनकी प्रेरक गाथाएं पहुंचाने के उद्देश्य से नवा रायपुर में एक भव्य डिजिटल संग्रहालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस पहल से पूरा आदिवासी समाज गौरवान्वित है।

प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि नवा रायपुर के सेक्टर-24 में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह संग्रहालय देश का पहला डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम होगा। इस अद्वितीय संग्रहालय का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्य स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना जैसी ऐतिहासिक योजनाएं लागू कीं, जिनसे जनजातीय अंचलों में विकास की नई रोशनी पहुंची है।

संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह का भव्य स्मारक बनाया गया है। यहां छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी आंदोलनों जैसे हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, और सोनाखान विद्रोह के साथ झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह की झलक प्रस्तुत की गई है। इन सभी को 14 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जहां अत्याधुनिक वीएफएक्स तकनीक, डिजिटल प्रोजेक्शन, इंटरएक्टिव स्क्रीन और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर सरगुजा कलाकारों की नक्काशीदार पैनल और 1400 वर्ष पुराने साल, महुआ एवं साजा वृक्ष की प्रतिकृति स्थापित की गई है, जिनकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों की डिजिटल कहानी अंकित है। यह वृक्ष मोशन फिल्म की तरह उन संघर्षों की गाथा जीवंत करता है।

यहां सेल्फी प्वाइंट, दिव्यांगों के लिए सुविधाएं, सीनियर सिटीजनों के लिए विशेष इंतजाम, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, तथा भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह और रानी गाइडल्यू की मूर्तियां स्थापित की जा रही हैं, जो आने वाले आगंतुकों को गर्व और प्रेरणा का अनुभव कराएंगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति का वैश्विक केंद्र बनेगा। यहां आने वाले लोग आदिवासी वीर नायकों की शौर्यगाथाओं से परिचित होकर गौरव और आत्मसम्मान का अनुभव करेंगे। यह न केवल हमारे पूर्वजों की स्मृति का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत भी है।

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