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Sirpur : संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का संगम…!जहाँ इतिहास बोलता है…संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है

Sirpur: A confluence of culture, history and spirituality, where history speaks, culture smiles and spirituality breathes

Sirpur

रायपुर, 28 अक्टूबर। Sirpur : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) न केवल एक पुरातात्त्विक धरोहर है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, इतिहास और अध्यात्म का अद्भुत संगम है। यह नगर कभी महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा और आज भी अपनी उत्कृष्ट स्थापत्य कला, बौद्ध विहारों और प्राचीन मंदिरों के लिए विश्वप्रसिद्ध है।

सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म से संबंधित स्थलों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। 7वीं शताब्दी में चीन के यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख किया था, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति को सिद्ध करता है। सिरपुर धार्मिक सहिष्णुता और कला का ऐसा उदाहरण है जहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष मिले हैं।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा यहाँ निरंतर संरक्षण एवं मरम्मत कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक जैसे डिजिटल टूर, क्यूआर कोड जानकारी और थ्री-डी गाइडेंस सिस्टम से पर्यटकों को सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ा जा रहा है।

यह नगर वास्तव में बौद्ध, जैन और हिन्दू स्थापत्य कला का त्रिवेणी संगम है। यहाँ का लक्ष्मण मंदिर भारत का पहला ईंटों से बना मंदिर माना जाता है, जो गुप्तकालीन वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। वहीं आनंदप्रभु कुटीर विहार बौद्ध भिक्षुओं का प्रमुख केंद्र रहा है। गंधेश्वर मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है, अपनी कलात्मक मूर्तियों और प्रतीकों के लिए प्रसिद्ध है।

सिरपुर के अवशेषों की खोज 1872 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी। इसके बाद हुए अनेक उत्खननों में बुद्ध, विष्णु, शिव और जैन परंपराओं के सैकड़ों प्रमाण मिले हैं। आज भी चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के विद्वान सिरपुर को एशिया की बौद्ध धरोहरों में महत्वपूर्ण स्थान देते हैं।

हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। स्थानीय लोगों के लिए ईको-ट्रेल, हस्तशिल्प बाजार और पारंपरिक व्यंजन केंद्र जैसी पहलें पर्यटन को बढ़ावा दे रही हैं और रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं।

राज्य सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का संकल्प लिया है। विजन 2047 के तहत यहाँ आधुनिक सड़कें, प्रकाश व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण हेतु अत्याधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं।

सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की संस्कृति और आत्मा का प्रतीक है। यहाँ के मंदिर, विहार, मूर्तियाँ और जीवंत परंपराएँ यह संदेश देती हैं कि भारत की असली पहचान उसकी सहिष्णुता, कला और ज्ञान में निहित है।सिरपुर वास्तव में वह स्थान है जहाँ इतिहास बोलता है, संस्कृति मुस्कुराती है और अध्यात्म सांस लेता है।

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