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Electricity Rates Hiked : छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी पर उठे सवाल…! स्टील प्लांट सब्सिडी में अनियमितताओं के आरोप…सरकार की कार्यप्रणाली पर विपक्ष ने साधा निशाना…कहा- अफसरों की मेहरबानी बनी जनता की सजा

Electricity Rates Hiked: Questions raised over the hike in electricity rates in Chhattisgarh! Allegations of irregularities in steel plant subsidies... The opposition targeted the government's functioning... saying, "The favoritism of officials has become a punishment for the public."

Electricity Rates Hiked

रायपुर, 25 अक्टूबर। Electricity Rates Hiked : छत्तीसगढ़ में हाल ही में बढ़ी बिजली दरों को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि बिजली दरों में इज़ाफ़ा जनता पर बोझ डालने वाला कदम है और इसके पीछे स्टील प्लांटों की बिजली सब्सिडी से जुड़ा बड़ा वित्तीय घोटाला छिपा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य में संचालित स्टील प्लांटों को पूर्व में 15 प्रतिशत बिजली बिल छूट दी जाती थी। आरोप है कि मुख्यमंत्री के खासमखास राम गर्ग और दूसरे खासमखास रवि मिश्रा शामिल हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुख्य सचिव सुपर सुबोध सिंह के लिए अलग से 15 करोड़ पहुंचाये गए। वसूले गये 55 करोड़ को राम और रवि ने करेंसी टावर में अपने पड़ोसी मां कुदरगढ़ी ग्रुप के यहां पार्क कर दिया। बाद में कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और व्यक्तियों की सांठगांठ से यह सब्सिडी 25 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई। लेकिन इस निर्णय से सरकारी राजस्व को लगभग 1400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ बताया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या इसी नुक़सान भरपाई करने के लिए जनता के लिए बिजली जनता के लिए बिजली बिल के दाम में इजाफा किया गया है? इसी के साथ यह भी आरोप है कि सब्सिडी में बढ़ोतरी के बदले कमीशन की वसूली की गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस कथित सौदे से जुड़े कुछ नाम सामने आए हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। बिजली उपभोक्ता संगठन और विपक्षी दलों ने सरकार से इस पूरी प्रक्रिया की जांच कराने और दरों में बढ़ोतरी के पीछे की वजहों को सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं, सरकारी सूत्रों का कहना है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी राजस्व संतुलन और उत्पादन लागत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए की गई है, न कि किसी अन्य कारण से। फिलहाल, राज्य विद्युत नियामक आयोग और ऊर्जा विभाग की भूमिका को लेकर जांच की मांग तेज़ हो गई है।
 
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